वक्री शुक्र का कन्या राशि में गोचर: शुक्र ग्रह को धन, वैभव, ऐश्वर्य, विलासिता, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं के कारक ग्रह माना जाता है। अतः शुक्र ग्रह की गोचर में मजबूती या कमजोरी हम सबके जीवन में प्रभाव डालती है, विशेषकर गृहस्थ और प्रेम जीवन में। अब शुक्र अपनी नीच राशि में गोचर करने जा रहे हैं।
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स्वाभाविक है कि शुक्र की स्थिति कमजोर रह सकती है और फलस्वरूप, शुक्र का यह गोचर आपके जीवन की लग्जरी, प्रेम और आनंद में व्यवधान डाल सकता है। वहीं जिनके जीवन में इस तरह की स्थितियां शुक्र की मजबूती के चलते पहले से मौजूद थी, शायद उन्हें कुछ राहत भी मिल सकती है। दरअसल शुक्र ग्रह इसी वर्ष 1 अगस्त 2026 से 2 सितंबर 2026 तक कन्या राशि में रह चुके हैं, फिलहाल शुक्र ग्रह वक्री होकर 6 नवंबर 2026 की दोपहर 1 बजकर 34 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, अर्थात नीच राशि में पहुंच रहे हैं।
एक तो वक्री ऊपर से नीच ये दोनों ही स्थितियां शुक्र को कमजोर करने का काम करेंगे। इस बार शुक्र ग्रह कन्या राशि में 6 नवंबर 2026 से 22 नवंबर 2026 तक रहने वाले हैं। शुक्र के इस गोचर के चलते देश-दुनिया में महिलाओं से संबंधित मामलों में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। आवागमन के साधन-संसाधन में भी कुछ प्रावधान रह सकते हैं। लग्जरी चीजों के मूल्य में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन शुक्र के इस गोचर का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं और सबसे पहले चर्चा करते हैं मेष राशि की…
Read Here In English: Venus Transit In Virgo (R)
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मेष राशि वालों के लिए शुक्र को आपकी कुंडली में दूसरे तथा सातवें भाव का स्वामित्व मिला हुआ है जो वक्री होकर आपके सप्तम भाव से छठे भाव में लौट रहे हैं। शुक्र ग्रह के गोचर को छठा भाव में अच्छे परिणाम देने वाला नहीं माना जाता है। ऊपर से शुक्र शुरुआत में वक्री भी रहेंगे, यह एक कमजोर बिंदु है। अतः शुक्र आर्थिक मामले में कुछ कमजोर परिणाम दे सकते हैं। साथ ही, साझेदारी के कामों में अथवा दांपत्य संबंधी मामलों में भी शुक्र के परिणाम कमजोर रह सकते हैं। लेकिन शत्रुओं से संबंधित मामले में जो परेशानियां आपको आ रही थी, अब वह दूर हो सकेंगी।
यदि आप गंभीरता से विश्लेषण करेंगे तो आपको कुछ ऐसे रास्ते मिल सकते हैं; जिससे आप उन परेशानियों को दूर कर सकते हैं। लेकिन लापरवाही की स्थिति में नए प्रतिस्पर्धी या नए शत्रु भी बन सकते हैं। इस गोचर के कारण स्वास्थ्य में चल रही पिछली खराबी ठीक हो सकती है, परंतु लापरवाही की स्थिति में नए सिरे से कोई परेशानी आ सकती है। अर्थात यह गोचर पुरानी समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है, लेकिन लापरवाही की स्थिति में नई समस्याएं भी दे सकता है। सीधे शब्दों में कहें, तो यह गोचर बहुत अच्छा नहीं रहेगा। इस गोचर की अवधि में सावधानी रखने की स्थिति में ही नकारात्मकता को नियंत्रित किया जा सकेगा।
उपाय: कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेना शुभ रहेगा।
वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपके लग्न या राशि के स्वामी होने के साथ-साथ आपके छठे भाव के भी स्वामी हैं। ये वक्री अवस्था में आपके छठे भाव से लौटकर पंचम भाव में पहुंच रहे हैं। सामान्य तौर पर पंचम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। लेकिन शुक्र नीच के रहेंगे और 14 नवंबर तक वक्री रहेंगे। भले ही पंचम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है, परंतु नीच के होने और वक्री होने के कारण शुक्र कमजोर रहेंगे।
विशेषकर 14 नवंबर तक नीच और वक्री दोनों स्थितियों के चलते स्वास्थ्य संबंधी मामलों का ख्याल रखना है। किसी से बेकार का विवाद नहीं करना है। विशेषकर स्वजनों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करनी है, तभी स्थितियां नियंत्रण में आ सकेंगी। वहीं 14 नवंबर के बाद परिणाम अच्छे हो सकेंगे। कहने का तात्पर्य है कि यह गोचर आपके फेवर वाला माना जाता है, लेकिन शुक्र स्वयं कमजोर है। अतः कुछ मामलों में कमजोरी देंगे। विशेषकर 14 नवंबर तक परिणाम तुलनात्मक रूप से कुछ कमजोर रह सकते हैं। 14 नवंबर के बाद स्थितियां बेहतर होगी, यानी इस गोचर को आप शुरुआती दिनों में एवरेज परिणाम देने वाला कह सकते हैं। वहीं 14 नवंबर के बाद एवरेज से बेहतर परिणाम देने वाला मान सकते हैं।
उपाय मां तथा मां समान स्त्रियों की सेवा करना और उनका आशीर्वाद लेना शुभ रहेगा।
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मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह को आपकी कुंडली में पंचम भाव का स्वामित्व मिला हुआ है। साथ ही,द्वादश भाव का भी स्वामित्व प्राप्त है। फिलहाल शुक्र, आपके पंचम भाव में थे, लेकिन वक्री अवस्था मेंपुनः आपके चतुर्थ भाव में पहुंच रहे हैं। सामान्य तौर पर चतुर्थ भाव में शुक्र के गोचर को अच्छा कहा गया है, लेकिन यहां कुछ विशेष परिस्थितियों बन रही हैं। ऐसे में, यहां पर शुक्र के परिणाम कुछ अलग रह सकते हैं, यानी शुक्र आपके घर-गृहस्थी और लग्जरी में कभी अच्छाई तो कभी कुछ व्यवधान दे सकते हैं, शुक्र का स्वभाव परिवर्तनशील रह सकता है। वहीं, ऐसे लोग जो कहीं दूर रह रहे हैं और घर वापसी की कोशिश कर रहे हैं, उनको कुछ व्यवधान देखने को मिल सकता है।
विशेषकर 14 नवंबर के बाद कठिनाई के बाद ही सही उनकी घर वापसी संभावित होगी। विदेश से संबंधित मामलों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन 14 नवंबर के बाद स्थितियां काफी अच्छी हो सकेंगी। प्रेम संबंध के मामले में भी पवित्रता बनाए रखने और मर्यादित रहने की जरूरत रहेगी। ऐसा करने की स्थिति में प्रेम संबंधों में अनुकूलता बनी रह सकेगी। लेकिन लापरवाही की स्थिति में परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। कहने का तात्पर्य है कि यह गोचर खराब तो नहीं है, लेकिन सावधानी की जरूरत रहेगी, तब हीपरिणाम अच्छे मिल सकेंगे।
उपाय: बहते हुए पानी में चावल बहाना शुभ रहेगा।
कर्क राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में लाभ भाव के स्वामी हैं। साथ ही, आपके चतुर्थ भाव के भी स्वामी हैं जो अब वक्री होकरआपके तीसरे भाव में पहुंच रहे हैं। वैसे तो सामान्य तौर पर शुक्र के तीसरे भाव में गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। लेकिन शुक्र नीच अवस्था में रहेंगे और 14 नवंबर तक शुक्र ग्रह वक्री भी रहेंगे। यही कारण है कि शुक्र की यह स्थिति आपको लाभ के मामले में कुछ अड़चनें दे सकती हैं। जहां कहीं से भी उपलब्धियां मिलने की संभावनाएं थीं, उनमें कुछ विलंब या कुछ व्यवधान देखने को मिल सकता है। चतुर्थ भाव का स्वामी अपने से द्वादश में नीच अवस्था में रहेगा।
यह घर-गृहस्थी के दृष्टिकोण से थोड़ा कमजोर माना जाएगा। हालांकि,14 नवंबर के बाद जब शुक्र की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर होगी, यानी कि शुक्र मार्गी होंगे तब आमदनी के रास्ते फिर से खुल जाएंगे और घरेलू समस्याएं भी कम हो सकती हैं। लेकिन इसके बावजूद भी यात्राओं के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता रहेगी। आपको पड़ोस में अपने संबंधों को मेंटेन करने की जरूरत रहेगी। भाई-बंधुओं के साथ संबंधों को मेंटेन करने की भी जरूरत रहेगी। यानी कि सावधानी अपनाने की स्थिति में आपको अच्छे परिणाम मिल सकेंगे। कहने का तात्पर्य है कि यह गोचर आपके फेवर का रहेगा, लेकिन कुछ मामलों में कुछ परेशानियां रहेगी। इसके बावजूद भी 14 नवंबर के बाद स्थितियां काफी हद तक अनुकूल हो जाएगी।
उपाय: महिलाओं का सम्मान करना और उनका आशीर्वाद लेना शुभ रहेगा।
सिंह राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में तीसरे भाव के स्वामी हैं। साथ ही, आपके दशम भाव के भी स्वामी होते हैं और यह वक्री अवस्था में आपके दूसरे भाव अर्थात कन्या राशि में पहुंच रहे हैं। सामान्य तौर पर दूसरे भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला कहा गया है, इसलिए शुक्र इरादतन कोई नुकसान नहीं करेंगे। लेकिन नीच अवस्था में होने के कारण कुछ मामलों में कठिनाइयां रह सकती हैं।
विशेषकर कार्यक्षेत्र और सामाजिक मामले में कुछ व्यवधान देखने को मिल सकते हैं। अत: इन मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह जरूरी रहेगा, अन्यथा पड़ोस के संबंधियों के साथ भी थोड़े मतभेद देखने को मिल सकती है। आपकी बातचीत का तौर-तरीका भी थोड़ा सा बदला हुआ रह सकता है। इन सभी मामलों में ध्यान देने की स्थिति में परिणाम संतुलित रहेंगे और 14 नवंबर के बाद परिणाम काफी हद तक अनुकूल हो सकेंगे। इसके बावजूद भी आर्थिक और पारिवारिक मामलों में सावधानी पूर्वक निर्वाह करना समझदारी का काम होगा।
उपाय: गाय का देशी घी मां दुर्गा के मंदिर में दान करना शुभ रहेगा।
कन्या राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में भाग्य भाव के स्वामी होने के साथ-साथ दूसरे भाव के भी स्वामी हैं। ये वक्री अवस्था में आपके पहले भाव में लौट रहे हैं। पहले भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छा कहा गया है। वैसे तो शुक्र नीच के हो रहे हैं जो एक कमजोर स्थिति है। लेकिन भाग्य स्थान का पहले भाव से कनेक्शन अच्छा माना जाएगा। वहीं धन भाव का भी पहले भाव से कनेक्शन अच्छा माना जाएगा। इसके बावजूद भी भाग्य के मामले में शुक्र तुलनात्मक रूप से ज्यादा अच्छा काम करेंगे, लेकिन आर्थिक मामले में पूर्णतः अनुकूलता देने में पीछे रह सकते हैं।
शुक्र के इस गोचर के चलते कर्मठता दिखाने की स्थिति में भाग्य का भी सपोर्ट मिल जाएगा। वहीं आर्थिक मामले में गंभीरता पूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता बनी रहेगी। बता दें कि आर्थिक मामले में लापरवाही बड़ा नुकसान दे सकती है जबकि भाग्य के मामले में इतनी कठिनाई नहीं रहेगी। पिता और पिता तुल्य व्यक्तियों के मार्गदर्शन में काम करते हुए साथ ही साथ अपने अनुभव का प्रयोग करते हुए आप अच्छा कर सकेंगे। मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी यानी मेहनत के अनुरूप परिणाम मिलते रहेंगे। आमोद-प्रमोद और मनोरंजन के भी अवसर मिलेंगे। इन सबके बावजूद भी 14 नवंबर तक तुलनात्मक रूप से अधिक गंभीरता पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता रहेगी। इसके बाद का समय अच्छा रह सकता है।
उपाय:काली गाय की सेवा करना शुभ रहेगा।
तुला राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी लगन या राशि के स्वामी है। साथ ही,आपके आठवें भाव के भी स्वामी हैं और यह वक्री होकर आपके द्वादश भाव में पहुंच रहे हैं। वैसे तो द्वादश भाव में शुक्र के गोचर को खराब नहीं माना जाता है, लेकिन लग्न या राशि के स्वामी का नीच अवस्था में द्वादश भाव में जाना, अच्छी स्थिति नहीं कही जाएगी। ऊपर से 14 नवंबर तक शुक्र ग्रह वक्री भी रहेंगे। अतः इस गोचर की अवधि में अपने स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह से जागरुक रहना जरूरी रहेगा। विशेषकर 14 नवंबर तक किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी है, उसके बाद तुलनात्मक रूप से स्थितियां बेहतर हो सकेंगी।
आप अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही भोग विलास में पड़ना है। किसी तरीके की नशे इत्यादि की आदत हो तो इस अवधि में उन सबसे बचना भी जरूरी रहेगा। विदेश यात्राओं की प्लानिंग में कुछ व्यवधान या विलंब रह सकता है। हालांकि, देर-सवेर इस मामले में काम बन जाने की संभावना रहेगी। मनोरंजन के मौके मिलेंगे लेकिन जरूरी कामों को छोड़कर मनोरंजन करना उचित नहीं रहेगा। आर्थिक मामले में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। व्यर्थ के खर्चों से बचेंगे तो आर्थिक मामले में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी। इस गोचर की अवधि में सावधानी बहुत जरूरी रहेगी। अनुकूल बात यह है कि सावधान रहने की स्थिति में कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि कुछ उपलब्धियां ही आपके हिस्से में आ जाएंगी।
उपाय: किसी सौभाग्यवती स्त्री को सम्मान पूर्वक सुहागसामग्री भेंट करना और उसका आशीर्वाद लेना शुभ रहेगा।
बृहत् कुंडली: जानें ग्रहों का आपके जीवन पर प्रभाव और उपाय
वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में द्वादश भाव के स्वामी हैं। साथ ही, सप्तम भाव के भी स्वामी हैं। वक्री अवस्था मेंद्वादश भाव से लाभ भाव में लौट रहे हैं। लाभ भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छा ही माना गया है। ऐसे में, आप शुक्र के गोचर से अनुकूल परिणामों की उम्मीद रख सकते हैं। फिर भी ध्यान रहे कि शुक्र नीच के रहेंगे। अतः व्यवधान के बाद ही लाभ मिल सकेंगे। इसी तरह दूर के स्थान से संबंधित मामलों में भी कुछ व्यवधान आएगा। इसके बाद ही उपलब्धियां मिल सकेंगी क्योंकि शुक्र सप्तम भाव के स्वामी होकर नीच अवस्था में जा रहे हैं।
अतः उपलब्धियों के चक्कर में व्यक्तिगत जीवन को नजरअंदाज करना ठीक नहीं रहेगा। यदि विवाहित हैं, तो गृहस्थ और दांपत्य जीवन का भी ख्याल रखें। वासनात्मक विचारों से भी स्वयं को दूर रखें। मर्यादित रहें, तभी आप अच्छे परिणामों की उम्मीद रख सकते हैं। विशेषकर 14 नवंबर तक दांपत्य संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार के लापरवाही उचित नहीं रहेगी। इसके बाद, इस पूरे गोचर की अवधि में जिम्मेदार बने रहने की स्थिति में दांपत्य जीवन भी संतुलित बना रहेगा।सामान्य तौर पर यह गोचर अच्छे परिणाम देना चाह रहा है, लेकिन कुछ मामलों में कठिनाइयां रहेगीजिन्हें आप सावधानी पूर्वक मेंटेन करके अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।
उपाय: शनिवार के दिन सरसों या तिल के तेल का दान करना शुभ रहेगा।
धनु राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में छठे भाव के स्वामी होने के साथ-साथ लाभ भाव के भी स्वामी हैं।अब यहवक्री होकर आपके कर्म स्थान पर लौट रहे हैं। वैसे भी दशम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छा नहीं कहा गया है। ऊपर से नीच अवस्था में होने के कारण शुक्र ग्रह आपके कार्यक्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषकर वरिष्ठों के साथ संबंध थोड़े उतार-चढ़ाव भरे रह सकते हैं। उस पर भी यदि आपके सीनियर या बॉस कोई स्त्री है, तो उसके साथ संबंधों को मेंटेन करना बहुत जरूरी रहेगा। हालांकि प्रतिस्पर्धात्मक मामलों में आ रही अड़चने कम हो सकती हैं और की गई मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। इसके बावजूद भी इस गोचर की अवधि में पूरी तरह से सजग रहना बहुत जरूरी रहेगा।
उपाय: मांस-मंदिरा, अंडे इत्यादि से दूर रहना और स्वयं को शुद्ध सात्विक बनाए रखना शुभ रहेगा।
मकर राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में कर्म स्थान अर्थात दशम भाव के स्वामी हैं। साथ ही, पंचम भाव के भी स्वामी हैं। हाल-फिलहाल ये आपके दशम भाव में गोचर कर रहे थे, लेकिन वक्री अवस्था में यह आपके भाग्य भाव में पहुंच रहे हैं। वैसे तो भाग्य भाव में शुक्र के गोचर को अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है। लेकिन नीच अवस्था में होने के कारण शुक्र जिन-जिन भावों के स्वामी हैं, उन भावों से संबंधित मामलों में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में, प्रेम संबंधों के दृष्टिकोण से शुक्र के इस गोचर को थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा कहा जाएगा।
बेहतर होगा कि आप संबंधों के प्रति लॉयल रहें, तभी आप वफ़ादारी की उम्मीद कर सकते हैं। संतान और शिक्षा और कार्यक्षेत्र के मामले में भी गंभीरता पूर्वक निर्वाह करना होगा। आप अपने कर्तव्यों का पालन करें,तभी अनुकूल परिणामों की उम्मीद की जा सकती है। कुछ विशेष तौर-तरीके अपनाने की स्थिति में यह गोचर आपको अच्छे परिणाम दे सकेगा। धर्म और अध्यात्म के प्रति जुड़ाव भी जीवन में अनुकूलता देने का काम करेगा।
उपाय: नीम के पेड़ की जड़ों पर जल चढ़ाना शुभ रहेगा।
कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में चतुर्थ भाव के स्वामी होने के साथ-साथ भाग्य भाव के भी स्वामी हैं। अब यह आपके भाग्य भाव से वक्री अवस्था में आपके अष्टम भाव में जा रहे हैं। वैसे तो अष्टम भाव में शुक्र के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम देने वाला कहा गया है। लेकिन शुक्र ग्रह नीच के रहेंगे, यह कमजोर स्थिति है। 14 नवंबर तक शुक्र वक्री रहेंगे। यह भी कमजोर स्थित है। अतः शुक्र कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन घर-गृहस्थी से संबंधित मामलों में जो फायदा उन्हें पहुंचाना चाहिए था, वैसा नहीं दे पाएंगे। एक तरह से देखें, तो यह आपका नुकसान ही हुआ।
इसी तरह से भाग्य के मामले में शुक्र उतना सपोर्ट नहीं दे पाएंगे जितना आमतौर पर उनको देना चाहिए। इस तरह से हम कह सकते हैं कि शुक्र आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन फायदा दिलाने में पीछे रह सकते हैं। हालांकि, अप्रत्याशित रूप से कुछ लाभ आपको मिल सकता है, यह अनुकूल बात है। इसके बावजूद भी भूमि, भवन और वाहन से संबंधित मामलों में जागरुकता जरूरी रहेगी। खासकर वाहन चलाते समय किसी भी प्रकार के लापरवाही ठीक नहीं रहेगी। पर्याप्त नींद लेना स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायता करेगा। कहने का मतलब यह है कि यह गोचर आपको मिले-जुले परिणाम दे सकता है। सावधानी रखने की स्थिति में परिणाम एवरेज से बेहतर भी रह सकते हैं।
उपाय:नियमित रूप से मां दुर्गा के मंदिर जाना और उन्हें झुक कर प्रणाम करना शुभ रहेगा।
मीन राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह आपकी कुंडली में तीसरे भाव के स्वामी होने के साथ-साथ आठवें भाव के भी स्वामी हैं। अब यह आपके अष्टम भाव से वक्री अवस्था में सप्तम भाव में जा रहे हैं। वैसे भी सप्तम भाव में शुक्र के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता है और ऊपर से शुक्र नीच अवस्था में रहेंगे। सप्तम भाव में शनि की दृष्टि भी रहेगी। ये सभी स्थितियां ठीक नहीं हैं। साथ ही, 14 नवंबर तक शुक्र ग्रह वक्री भी रहेंगे। कुल मिलाकर, शुक्र की स्थिति न केवल प्रतिकूल होगी, बल्कि कमजोर भी रहेगी। अतः शुक्र के परिणाम किसी एक तरह से स्पष्ट नहीं रहेंगे।
कभी-कभी विरोधी का कमजोर होना फायदा दिलाता है, तो वहीं सेंसिटिव भाव में जाकर कमजोर होना नुकसान भी दिलाता है। ऐसी स्थिति में कम से कम दांपत्य जीवन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी है। भाई, बंधु और पड़ोसियों से संबंधित मामलों में उन्हें कॉन्फिडेंस में लेकर ही आगे बढ़ना समझदारी का काम होगा। किसी भी महत्वपूर्ण काम को करने के लिए थोड़ा सा एक्स्ट्रा टाइम लेकर चलना भी जरूरी रहेगा। इस गोचर की अवधि में हर मामले में सावधानी बरतनी है, लेकिन जिन मामलों का उल्लेख हमने किया है, उनमें विशेष सावधानी बरतनी है, तभी आप संतुलित परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं।
उपाय: भूरी गाय की सेवा करना शुभ रहेगा।
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1. वक्री शुक्र का कन्या राशि में गोचर कब होगा?
शुक्र ग्रह वक्री अवस्था में 06 नवंबर 2026 को कन्या राशि में गोचर करेंगे।
2. शुक्र किस राशि में वक्री हुए थे?
शुक्र देव 03 अक्टूबर 2026 को तुला राशि में वक्री हो गए थे।
3. शुक्र ग्रह कौन हैं?
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, ऐश्वर्य और विलासिता के कारक माना जाता है।