वक्री बुध का तुला राशि में गोचर - 14 अक्टूबर, 2020

व्यापार, बुद्धि, हमारी वाणी, आदि के कारक माने जाने वाले बुध देव का, तुला राशि में वक्री होना, ज्योतिष शास्त्रों में बेहद महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जाता है। वैदिक शास्त्र अनुसार, बुध मुख्य रूप से बुद्धि, वाणी, चेतना, व्यापार, सांख्यिकी और त्वचा आदि का कारक होता है और अब यही लाभ दाता ग्रह बुध, अपनी वक्री गति करते हुए, 14 अक्टूबर 2020, बुधवार को, तुला राशि में प्रातः 6.00 बजे अपना गोचर करेगा। और मार्गी होने के बाद वो पुनः 03 नवंबर 2020, मंगलवार को, रात 10 बजकर, 46 मिनट पर वृश्चिक राशि में पुनः प्रवेश कर जाएगा।

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वक्री बुध के इस गोचर का प्रभाव कई राशि के जातकों के जीवन में बहुत सी परेशानी लेकर आने वाला है। क्योंकि इस प्रकार बुध के इस वक्री अवस्था में होने वाले गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर किसी न किसी रूप से देखने को मिलेगा।

तो आईये अब जानते हैं कि वक्री बुध का प्रभाव आपकी राशि पर किस प्रकार डालेगा प्रभाव:-


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि।
वक्री बुध का तुला राशि में गोचर

मेष राशि

आपकी राशि के लिए बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी है, और इस गोचर के दौरान वक्री अवस्था में बुध आपके सप्तम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी एवं, जीवन के अन्य क्षेत्रों में बनने वाले साझेदारों का विचार किया जाता है। चूंकि संप्तम भाव का सीधा संबंध वैवाहिक जीवन से है तो, निश्चित रूप से बुध के इस वक्री गोचर का प्रभाव, आपके शादीशुदा जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव लेकर आ रहा है।

पार्टनरशिप का बिज़नेस कर रहे जातकों को भी इस समय अपने साझेदार से, संबंध बेहतर बनाकर चलने की ज़रूरत होगी, अन्यथा विवाद होने की आशंका, अधिक बनती दिखाई दे रही है। प्रेमी जातकों के जीवन में कोई पुराना ख़ास मित्र, इस वक्री गोचर के दौरान पुनः लौट सकता है, जिससे आपके रिश्ते में दूरियाँ आने की आशंका रहेगी। हालांकि इस समय आपको ये समझने की ज़रूरत होगी कि, अपने प्रियतम संग हर विवाद को सुलझाएं। ऐसा करने से आप दोनों, खुद को एक दूसरे के बेहद करीब लानें और अपने रिश्ते को मजबूत बनाने में सफल होंगे।

यदि आप शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं तो, अभी शादी की तारीख को बुध के मार्गी होने तक टाल दें, अन्यथा परेशानी हो सकती है। बिज़नेस पार्टनरशिप में कर रहे जातकों को, अपने सहयोगी के साथ बैठकर व्यापार में, एक दूसरे की भूमिका और ज़िम्मेदारी को सही से बांटने की आवश्यकता होगी। ताकि दोनों अपना-अपना काम, बिना किसी बाधा के पूरा करने में सफल हो सकें। वहीं, कार्यस्थल पर हर प्रकार के विवाद और झगड़े से बचकर रहना ही आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। यात्रा पर जाने के अवसर मिलेंगे, लेकिन अभी यात्रा से परहेज करें। अन्यथा आपको लाभ की जगह हानि हो सकती है।

उपाय: नियमित रूप से “विष्णु सहस्रनाम” का जप करना आपके लिए अच्छा रहेगा।

वृषभ राशि

आपकी राशि के लिए, बुध दूसरे और पांचवें भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान अपनी वक्री अवस्था में वह आपके षष्टम भाव में प्रवेश करेगा। छठे भाव के द्वारा जीवन में संघर्षों के बारे में पता चलता है। ज्योतिष में इस भाव को शत्रु भाव कहा जाता है। इस भाव से विरोधियों, रोग, पीड़ा, जॉब, कम्पीटीशन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शादी-विवाह में अलगाव एवं क़ानूनी विवादों को देखा जाता है। बुध का ये वक्री गोचर आपके लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहा है।

कार्यक्षेत्र पर, आपको मीटिंग, कार्य, योजना, आदि हर चीज को नियमित रूप से व्यवस्थित करने की ज़रूरत होगी, तभी आप सफलता पूर्वक किसी भी कार्य को समय पर पूरा कर सकेंगे। यदि कार्यस्थल पर, अपने सहकर्मियों संग किसी भी तरह का विवाद चल रहा था तो, ये समय सभी विवाद को खत्म करके रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए बेहद उत्तम दिखाई दे रहा है। इसके लिए आपको उनके साथ बातचीत करके, हल निकालने की ज़रूरत होगी।

चूंकि बुध देव विचारों के कारण होते हैं, ऐसे में अपने विचार और सुझावों को किसी के साथ भी सांझा करते समय, विशेष सावधान रहें, अन्यथा आपकी बातों का गलत मतलब निकाला जा सकता है, जिससे आपको ही परेशानी होगी। आर्थिक रूप से भी, समय थोड़ा प्रतिकूल रहने वाला है, इसलिए किसी भी तरह के लेन-देन से, इस समय बचकर रहना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। अपने धन को खर्च करते समय सतर्क रहें, क्योंकि योग बन रहें हैं कि घर-परिवार में किसी सदस्य के स्वास्थ्य के ऊपर, आपको अचानक से अपना धन ख़र्च करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक तंगी तक होने की आशंका रहेगी।

यदि आपने किसी को पैसे उधारी पर दिए थे तो, इस गोचर के दौरान उनके वापस मिलने की संभावना थोड़ी कम ही दिखाई दे रही है। सेहत के प्रति सावधानी बरतें, क्योंकि आशंका है कि, आपका कोई पुराना रोग आपको पुनः परेशान कर सकता है। हालांकि व्यायाम करने और सही खान-पान लेने के लिए, समय बेहद शुभ रहेगा। इसलिए रोज़ाना योग व व्यायाम करते हुए खुद को हर प्रकार के मानसिक तनाव से दूर रहें।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को, अपनी पूर्व की मेहनत का इस समय अच्छा फल मिल सकता है। लेकिन उसके लिए आपको लगातार मेहनत करते रहें की आवश्यकता होगी।

उपाय: शुभ फलों की प्राप्ति हेतु, नियमित रूप से तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें।

मिथुन राशि

बुध ग्रह आपकी राशि का स्वामी होने के साथ-साथ आपके चतुर्थ भाव का स्वामी है और अपने इस गोचर के दौरान वक्री गति से आपके पंचम भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली में इस भाव को संतान भाव के नाम से भी जाना जाता है। इस भाव से रोमांस, संतान, रचनात्मकता, बौद्धिक क्षमता, शिक्षा एवं नए अवसरों को देखा जाता है।

वक्री बुध के इस गोचर के दौरान, अपने विचारों और सुझावों को लेकर आप में आत्मविश्वास की कमी साफ़ देखी जाएगी। जिससे आप थोड़ा असहज भी महसूस कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, किसी भी कार्य को पूरा करने में आपको सामान्य से अधिक समय लगेगा। इसलिए आपको जरूरत होगी, खुद को हर चुनौती के लिए पहले से तैयार रखने और, अपनी प्रतिभाओं को समय रहते निखारने की, ताकि आने वाले समय में आप सफलता के लिए अपने अनुसार सही योजना बना सकें।

पारिवारिक जीवन में, आपकी मां को आपके चलते कोई लाभ मिल सकता है। दांपत्य जीवन में वक्री बुध के गोचर के दौरान आपको अपनी संतान के साथ समय बिताने का मौका भी मिलेगा। इस दौरान आप में आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की बढ़ोतरी साफ दिखाई देगी।

ज्योतिष में कुंडली के पंचम भाव से, रोमांस और प्रेम का ज्ञात होता है, इसलिए वक्री बुध के गोचर के दौरान आप अपने प्रियतम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असफल रहेंगे। इससे आपका प्रेमी आप से नाराज़ भी हो सकता है। वहीं, यदि आप अभी तक सिंगल थे तो, इस समय किसी भी तरह के नए रिश्ते में आना, आपके लिए हानिकारक साबित होगा। इसलिए अभी किसी भी नए रिश्ते में आने से बचें।

शादीशुदा जातकों की बात करें तो, उनके जीवन में इस समय कोई पूर्व का प्यार लौट सकता है। जिस कारण आपका वर्तमान सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। इसलिए आपको अपने जीवन साथी के साथ अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए वैवाहिक जीवन में, अपने प्रयास तेज करने की आवश्यकता होगी।

उपाय: सोने की मुद्रिका में, अपने दाहिने हाथ की छोटी उँगली में पन्ना पहनें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी।


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कर्क राशि

इस राशि के लोगों के लिए बुध आपकी कुंडली के बारहवें तथा तीसरे भाव का स्वामी है। अपने इस गोचर के दौरान, वे आपके चतुर्थ भाव में संचरण करेगा। कुंडली के चौथे भाव को सुख भाव कहा जाता है। इस भाव से माता, जीवन में मिलने वाले सभी प्रकार के सुख, चल-अचल संपत्ति, लोकप्रियता एवं भावनाओं को देखा जाता है।

वक्री बुध के गोचर के दौरान, आप अपनी सारी ऊर्जा घर की मरम्मत और साज-सज्जा पर लगाते दिखाई देंगे। इस समय आप घर में पड़े पुराने सामान को भी बदल सकते हैं। साथ ही साथ घर की सजावट पर भी खुलकर खर्च करते दिखाई देंगे। हालांकि ऐसे में आपको अपने ख़र्चों पर, ध्यान देने की जरूरत होगी, अन्यथा जरूरत से ज्यादा धन खर्च करने से, आर्थिक तंगी हो सकती है।

कुंडली के चतुर्थ भाव से, माता का ज्ञात होता है, इसलिए आपकी मां को कोई पुराना रोग गोचर के दौरान पुनः परेशान कर सकता है। इसलिए समय-समय पर उनसे संवाद करें और उनकी मदद करते रहें। इससे आप दोनों के रिश्ते में नयापन और मजबूती आएगी। कार्यक्षेत्र पर आपको किसी भी कार्य को, पूरा करने में कुछ परेशानी उठानी पड़ सकती है।

हालांकि इस दौरान, आपके सहकर्मी और आप के अधीन काम करने वाले कर्मी, आपके सबसे बड़े मददगार साबित होंगे, और वो हर कदम पर आपका सहयोग करते दिखाई देंगे। जिससे आप अपना कार्य करने में सफल होंगे। यात्रा पर जाने के अवसर भी मिलेंगे, और खासतौर से आपको विदेशी यात्रा से लाभ होने की अधिक संभावना रहेगी।

आपकी सेहत की बात करें तो, आपको श्वास या त्वचा संबंधित समस्या हो सकती है। इसलिए शुरुआत से ही सावधान रहें और अपने खान-पान पर, पूरा ध्यान दें। इससे आपको जल्द ही ठीक होने में भी मदद मिलेगी।

उपाय: स्वास्थ्य जीवन में बेहतर परिणामों के लिए, चाँदी के गिलास से ही पानी पियें।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए बुध ग्रह दूसरे तथा ग्यारहवें भाव का स्वामी है, तथा अपने वक्री गोचर के दौरान आपके तृतीय भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली में तीसरे घर को सहज भाव कहा जाता है। इस भाव से व्यक्ति के साहस, इच्छा शक्ति, छोटे भाई-बहनों, जिज्ञासा, जुनून, ऊर्जा, जोश और उत्साह को देखा जाता है।

ऐसे में वक्री बुध का ये गोचर, आपके लिए अनुकूल परिणाम लेकर आने वाला है। आप इस दौरान, अपने भाई-बहनों के साथ समय बिताते, साथ ही उनसे बातचीत करते दिखाई देंगे। जिससे आपके और उनके रिश्तों में आ रही दूरियाँ खत्म होगी। आपको छोटी दूरी की यात्रा पर जाना पड़ सकता है। ये यात्रा आपके लिए लाभदायक रहेगी, क्योंकि इससे आपको खुशी और प्रसन्नता मिलेगी। हालांकि किसी भी यात्रा पर जाने से पहले, अपने वाहन, यात्रा की जगह, अपने सभी दस्तावेज़, आदि हर चीज़ की जाँच सही से पहले ही कर लें। अन्यथा बेकार की परेशानियों से जूझना पड़ सकता है।

बुध की यह स्थिति, कार्यक्षेत्र पर आपको अधिक मेहनत कराने का कार्य करेगी। तभी जाकर आपको अपनी इच्छा अनुसार बेहतर फलों की प्राप्ति होगी। इसलिए किसी भी सहकर्मी से संवाद या मेल पर संपर्क करते समय, अपने शब्दों को सही से जांच लें, अन्यथा परेशानी हो सकती है। साथ ही कार्यस्थल पर, हर किसी के सुझावों और विचारों का सम्मान करते हुए, उनको भी प्राथमिकता देना आपके आवश्यक होगा, अन्यथा दूसरों के बीच आपकी छवि खराब हो सकती है।

बुध ऊर्जा का भी कारक होता है, इसलिए आपको अपने सभी बिजली से चलने वाली वस्तु एवं उपकरणों पर, इस गोचर के दौरान ध्यान देने की जरूरत होगी, अन्यथा उनके खराब होने या खो जाने से, आपको अपना अच्छा खासा धन खर्च भी करना पड़ सकता है।

इस समय खुद का मनोरंजन करने के लिए समय बेहद अच्छा है। इसलिए अलग-अलग शौक और अन्य मनोरंजन गतिविधियों से आनंद लें। ऐसा करने से आपको अपनी रचनात्मक क्षमता बढ़ाने और तनाव को दूर करने में मदद मिलेगी, जिससे आप अपने कार्यों को सही से पूरा कर सकेंगे।

उपाय: भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ाना आपके लिए शुभ रहेगा।


कन्या राशि

बुध ग्रह आपकी ही राशि का स्वामी है और साथ ही साथ आपके दशम भाव पर भी आधिपत्य रखता है। और अपने इस गोचर के दौरान वह आपके द्वितीय भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में दूसरे भाव से व्यक्ति के परिवार, उसकी वाणी, प्रारंभिक शिक्षा एवं धन आदि का विचार किया जाता है। वक्री बुध के इस गोचर के दौरान आपको मिश्रित फलों की प्राप्ति होगी।

विशेष रूप से, कन्या राशि के जातक इस दौरान, आर्थिक रूप से अपने धन को संचय करने में सफल होंगे। जिससे वो अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित कर सकेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें अपने धन को सही रणनीति के अनुसार ही ख़र्च करने की जरूरत होगी। व्यापारी जातक, यदि आप कोई नया निवेश करना या नया व्यापार खोलना चाह रहे हैं तो, उसके लिए समय बेहद अच्छा है। आप इससे धन लाभ करने में सफल होंगे।

हालांकि गोचर के दौरान, आपको बहुत से अतिरिक्त खर्चें करने पड़ सकते हैं, लेकिन बावजूद इसके इन ख़र्चों का असर, आपकी आर्थिक स्थिति पर बिल्कुल भी नहीं पड़ेगा। पारिवारिक जीवन में, कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है। जिसके चलते आपको घर के खराब वातावरण से थोड़ी मानसिक परेशानी से भी जूझना पड़ सकता है। इसके लिए आपको घर वालों के साथ बैठकर सही संवाद रखने की जरूरत होगी।

सेहत के लिहाज से समय थोड़ा परेशानी देगा। आपको अपने खराब खान-पान और अनियमित भोजन करने की आदत को, सुधारने की ज़रूरत होगी। अन्यथा स्वास्थ संबंधी परेशानी हो सकती है। इसके लिए जितना संभव हो हरी सब्ज़ियाँ अपने खाने में शामिल करें और समय-समय पर दूसरा ज़रूरी आहार-पोषण लेते रहें।

उपाय: नियमित रूप से गौ माता को हरा चारा खिलाएं।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए बुध बारहवें तथा नवें भाव का स्वामी है, और इस दौरान बुध का गोचर, आपके प्रथम भाव में होगा। इसे लग्न भाव भी कहते हैं। प्रथम भाव को हमारे व्यक्तित्व का आईना बताया गया है। इसी के द्वारा हमारा शरीर, समाज में हमारी पहचान तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में भी, जाना जा सकता है। आपके लग्न में वक्री बुध का गोचर, आपके लिए बेहद शुभ साबित होगा।

इस समय आपको भाग्य का साथ मिलेगा, जिससे आप अपने कार्य की हर बारीकी को समझते हुए ही, उस कार्य को करेंगे। इससे आपको कार्यस्थल पर भरपूर सफलता भी मिलेगी। हालांकि बुध की स्थिति, आपको अति-पूर्णतावादी बनाएगी, जिससे आप हर एक काम को बार-बार जांच करने में, अपना ज्यादातर समय बर्बाद कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, आप कार्य को समय पर पूरा करने में असफल होंगे। जिससे आपको असहजता और मानसिक तनाव मिलेगा।

बुध देव आपको इस समय, अधिक नाज़ुक व भावुक बनाएँगे। जिसका सीधे तौर पर नकारात्मक प्रभाव, आपके निजी व आपके पेशेवर जीवन पर पड़ सकता है। हालांकि नवम भाव के चलते, आपको किसी बड़े, खासतौर से पिता या पिता तुल्य व्यक्ति की सलाह मिलती रहेगी, जो आपको निर्णय लेने में मदद करेगी।

चूँकि प्रथम भाव से, आपके व्यक्तित्व का भी पता चलता है, इसलिए बुध के प्रभाव से आप इस समय अपने व्यक्तित्व को लेकर थोड़ा अधिक सतर्क दिखाई देंगे। विशेष रूप से, आप दूसरों के सामने आने या खड़े होने में संकोच कर सकते है। इसलिए लिए आप खुद पर भी जमकर खर्च करेंगे। यात्राओं पर जाने का अवसर मिलेगा, और विदेशी यात्रा से आप लाभ अर्जित करने में सफल होंगे।

उपाय: छोटी कन्याओं को मिठाई बाटें, और उनका आशीर्वाद लें।

वृश्चिक राशि

बुध ग्रह का गोचर, आपकी राशि से द्वादश भाव में होगा। बुध ग्रह आपके लिए अष्टम तथा एकादश भाव का स्वामी है। ज्योतिष में द्वादश भाव व्यय भाव कहलाता है। इस भाव से ख़र्चे, हानि, मोक्ष, विदेश यात्रा आदि को देखा जाता है। ऐसे में इस गोचर के दौरान वक्री बुध आपको प्रतिकूल फल देगा।

इस दौरान आपको, कुछ सेहत संबंधित समस्याएँ या अभूतपूर्व विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है। जिसके चलते आपको, अपना अच्छा खासा धन भी खर्च करना होगा। आपको कई यात्राएं करने का मौका भी मिलेगा। हालांकि अभी इन यात्राओं से बचना ही आपके लिए बेहतर रहेगा, अन्यथा आपको हानि होने के योग बन रहे हैं, जिससे आपके मानसिक तनाव में भी वृद्धि होगी।

कार्यक्षेत्र के लिहाज से भी, आपके लिए ये समय अच्छा नहीं दिखाई दे रहा, क्योंकि इस दौरान आपके शत्रुओं की संख्या में इज़ाफा होगा, और कार्यस्थल पर विरोधी आपके काम में बाधा उत्पन्न करते दिखाई देंगे। इसलिए आपको इस समय, उनसे विशेष सावधान रहने की जरूरत होगी। इस दौरान जितना संभव हो, कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के विवाद या झगड़े से खुद को दूर ही रखकर चलें, अन्यथा आपकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही, ऐसे हर कार्य को करने से बचें, जो कानून विरोधी हो, अन्यथा आप खुद को किसी बड़ी मुसीबत में फंसा बैठेंगे।

इस दौरान आपका रुझान, धार्मिक व आध्यात्मिकता की ओर भी अधिक लगेगा। ऐसे में आपको आवश्यकता होगी, इस समय नियमित रूप से योग और व्यायाम करने की, क्योंकि ऐसा करने से न केवल, आप खुद के अंदर से नकारात्मक विचारों और भावनाओं को खत्म करने में सफल होंगे, बल्कि आपको प्रसन्नता की अनुभूति भी होगी। साथ ही रोज़ाना कम से कम 7 से 8 घंटों की नींद ज़रूर ले। इससे आप खुद को तनाव मुक्त रखने में सफल होंगे।

उपाय: भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा की, एक साथ उपासना करें।

धनु राशि

आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर करने वाला वक्री बुध, आपकी राशि के लिए सप्तम और दशम भाव का स्वामी ग्रह है। कुंडली में एकादश भाव को आमदनी का भाव कहा जाता है। इस भाव से आय, जीवन में प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की उपलब्धियाँ, मित्र, बड़े भाई-बहनों आदि को देखा जाता है। इसलिए बुध का ये वक्री गोचर, आपके लिए विशेष लाभकारी सिद्ध होने वाला है।

इस दौरान आपको, अपनी कमज़ोर पड़ी आर्थिक स्थिति को, मजबूत करने के कई अवसर प्राप्त होंगे, जिससे आपको धन लाभ होने के साथ-साथ, सामाजिक सम्मान भी मिल सकेगा। कार्यक्षेत्र पर, आपकी मेहनत के चलते आपको, अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पदोन्नति मिल सकती है। यदि आप नौकरी बदलने का सोच रहे थे तो, आपको इस दौरान स्थानांतरण करने के भी, कई अच्छे मौके मिलेंगे। वहीं, व्यापारी जातकों को पार्टनरशिप में बिज़नेस करने से, इस गोचर के दौरान अच्छा खासा लाभ होने की संभावना बन रही है।

ये गोचर आपकी मुलाक़ात, आपके कुछ पुराने मित्रों व करीबियों से करा सकता है। उनसे मिलकर न केवल आपको खुशी और प्रसन्नता की अनुभूति होगी। साथ ही, आपको उनकी मदद से कोई ऐसा नया व्यापार या नया निवेश करने का अवसर भी प्राप्त होगा, जिसकी आपने उम्मीद भी नहीं की होगी।

वक्री बुध जब तुला में विराजमान होगा, तब परिणामस्वरूप उसका शुभ प्रभाव आपको अपनी इच्छा अनुसार, शुभ फलों की प्राप्ति कराने में मदद करेगा, और इस दौरान आपका प्रेमी और जीवनसाथी, आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलता दिखाई देगा। साथी का सहयोग आपको हर चुनौती से लड़ने में आपकी मदद करेगा।

उपाय: उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए, किन्नरों को भोजन कराए, साथ ही उन्हें दान-दक्षिणा दें।

मकर राशि

बुध ग्रह का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा, तथा वह आपकी राशि से छठे तथा नवम भाव पर अपना अधिकार रखता है। ज्योतिष में दशम भाव, करियर एवं प्रोफेशनल, पिता की स्थिति, रुतबा, राजनीति एवं जीवन के लक्ष्यों की व्याख्या करता है। इसे कर्म भाव भी कहा जाता है। बुध का ये गोचर, मकर राशि के जातकों के लिए विशेष भाग्यशाली रहने वाला है।

यह वो समय होगा, जब आपको अपनी पूर्व की मेहनत अनुसार ही, फलों की प्राप्ति होगी और साथ ही आप पूर्व के अधूरे पड़े, अपने हर कार्य इस दौरान सफलता पूर्वक पूरे कर सकेंगे। इस समय आप में, प्रतिस्पर्धा शक्ति की भी अचानक से वृद्धि होगी, जिससे आप अपनी राह में आने वाली हर बाधा से, पार पाते बेहद आसानी से निकल जाएंगे। कार्यक्षेत्र पर आपको, अपने सहकर्मियों का भरपूर साथ मिलेगा, जिससे कार्य करने की आपकी क्षमता में, वृद्धि दिखाई देगी।

बुध के इस वक्री गोचर के दौरान, आप नई-नई टेक्नोलॉजी, कार्यक्षेत्र पर सीखते और उसे अपने कार्यों में इस्तेमाल करते नजर आएँगे। खासतौर से बिज़नेस करने वाले जातकों को, इसी नई टेक्नोलॉजी के बल पर, अच्छा मुनाफ़ा कमाने के कई अवसर मिल सकते हैं। यदि आपके अपने पिता के साथ संबंध खराब थे तो, बुध के इस गोचर के दौरान, आपके और पिता के संबंधों में निखार आएगा, और आप उनकी सलाह लेते भी दिखाई देंगे। उनके सलाह-मशवरे के चलते ही, आपको लंबे समय के लिए फायदा मिल सकेगा।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को, जीवन में ऊंचाइयां छूने का अवसर मिलेगा और वह कामयाबी के पायदान पर, चढ़ने में सफल होंगे। पारिवारिक जीवन में, घर-परिवार का वातावरण खुशहाल रहेगा, जिससे आप तनाव मुक्त होकर, प्रकृति की सुंदरता के दर्शन करते दिखाई देंगे। इस दौरान आप खुद को अंदर से तरोताजा महसूस करेंगे।

उपाय: बुध देव को प्रबल बनाने के लिए, रोज़ाना घर में कपूर जलाएं।

कुंभ राशि

बुध ग्रह का गोचर, वक्री अवस्था में आपके नवम भाव में होगा और वह आपकी राशि के लिए, पांचवें तथा आठवें भाव का स्वामी है। ज्योतिष में नवम भाव को भाग्य भाव कहते हैं। इस भाव से व्यक्ति के भाग्य, गुरु, धर्म, यात्रा, तीर्थ स्थल, सिद्धांतों का विचार किया जाता है। भाव वक्री बुध के तुला में गोचर के दौरान, आपको इस गोचर से बेहद शुभ फलों की प्राप्ति होगी।

कार्यक्षेत्र पर, आपके विचारों और सुझावों की जमकर सराहना, आपके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी, जिससे आपको तरक्की व उन्नति करने के, कई सुन्दर अवसर भी प्रदान होंगे। इस दौरान संभावना है कि, आपको आर्थिक लाभ व कोई उपहार भी प्राप्त हो। आपका मन इस गोचर के समय, रहस्यमय विषयों जैसे: ज्योतिष विज्ञान, गुप्त विषयों, आदि की पढ़ाई में, अधिक लगेगा।

बुध का ये गोचर, आपको धार्मिक स्थलों और तीर्थस्थलों की यात्राएं करने का, अवसर भी प्रदान करेगा, जिससे आपको अंदरूनी शांति महसूस होगी। प्रेम जीवन की बात करें तो, वक्री बुध की ये स्थिति, आपको अपनी भावनाओं और अपने प्यार का इज़हार अपने प्रेमी के सामने करने का हौसला देगी। इस दौरान आप उनके साथ, सुन्दर समय बिताते भी नजर आएँगे। साथ ही आप, प्रेमी की मनपसंद जगह पर भी जा सकते हैं, जहाँ आप उनकी देखभाल करके, उनका दिल जीत पाने में सफल होंगे। इससे आप दोनों का रिश्ता और मजबूत होगा। साथ ही उसमें, प्रेम की भरमार भी साफ़ दिखाई देगी।

छात्रों की बात करें तो, उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वाली छात्रों को, इस गोचर के दौरान शुभ फलों की प्राप्ति होगी, क्योंकि उनके लिए बुध का ये गोचर, बेहद उत्तम फल लेकर आ रहा है।

उपाय: बुध के शुभ फलों की प्राप्ति के लिए, ज़रूरतमंद छात्रों को शिक्षा की सामग्री भेट करें।


मीन राशि

आपकी राशि के लिए, बुध ग्रह चतुर्थ तथा सप्तम भाव का स्वामी है और, अपने इस वक्री गोचर के दौरान वह आपके अष्टम भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली के अष्टम भाव को आयुर्भाव कहा जाता है। इस भाव से, जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, अचानक से होने वाली घटनाएँ, आयु, रहस्य, शोध आदि को देखा जाता है। ऐसे में मीन राशि के जातकों को, वक्री बुध के गोचर के दौरान सामान्य से कम अच्छे फलों की प्राप्ति होगी।

इस समय वक्री बुध, आपकी माता को सेहत संबंधित कष्ट प्रदान करेगा, जो आपके मानसिक तनाव की बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण होगा। आपके वैवाहिक जीवन में भी, ये गोचर बहुत से उतार-चढ़ाव लेकर आ रहा है। हालांकि ये उतार-चढ़ाव, कुछ समय के लिए ही रहेंगे और उसके बाद स्थितियाँ, धीरे-धीरे सामान्य होती प्रतीत होंगी। यदि आप बिज़नेस पार्टनरशिप में करते हैं तो, आपके लिए ये समय अच्छा नहीं दिखाई दे रहा।

आपका इस दौरान, अपने सहयोगी के साथ किसी बात को लेकर विवाद संभव है। इस समय आप अपने पार्टनर को बेहद गंभीरता से लेंगे, और व्यवसाय में कुछ भी गलत या हानि होने पर सारा दोष, उसके ऊपर मढ़ते नजर आएँगे। हालांकि सहयोगी के प्रति आपकी ये गंभीरता, आपको बहुत से नुकसान से बचाने का कार्य भी करेगी।

बुध इस समय, आपको अपनी किसी पैतृक संपत्ति से अच्छा खासा लाभ भी दे सकते हैं। यदि आप किसी यात्रा पर जाने का प्लान कर रहे थे तो, अभी उसे टाल दें ,अन्यथा आपको स्वास्थ्य संबंधी हानि व आर्थिक हानि होने की आशंका बन रही है। किसी भी प्रकार के लेन-देन से भी, इस समय परहेज करना, आपके लिए बेहतर होगा।

यदि आपने अभी तक, अपना टैक्स नहीं भरा है तो, उसे समय रहते भर दें, अन्यथा सरकारी पचड़े में फँस सकते हैं। आपके स्वास्थ्य जीवन को देखें तो, वाहन चलाने वाले जातकों को, वाहन चलाते समय, विशेष सावधानी बरतनी होगी। अन्यथा कोई दुर्घटना हो सकती है। साथ ही आपको इस समय, पेट संबंधित कोई विकार भी परेशान करेगा। इसलिए योग और व्यायाम को रोज़ाना करते हुए, अपने खान-पान का ध्यान रखें। तभी आप खुद को सेहतमंद रख सकेंगे।

बुध का यह गोचर, आपको अपनी ग़लतियों से न केवल सिखाएगा, बल्कि आप इन ग़लतियों से सीख लेते हुए, आप भविष्य में वही गलती नहीं दोहराएँगे। इस दौरान, आपकी कोई छुपी रुचि या योग्यता भी निकलकर सामने आएगी, जिससे आपके अंदर खोया आत्मविश्वास भी, वापस लौट सकेगा।

उपाय: बुध की होरा पर, बुध देव के बीज मंत्र का जप करने से, आपको उत्तम फलों की प्राप्ति होगी।


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