• AstroSage Big Horoscope
  • Ask A Question
  • Raj Yoga Reort
  • Shani Report

वक्री बुध का तुला राशि में गोचर - 7 नवंबर, 2019

विभिन्न ग्रहों के अध्ययन के संदर्भ में वैदिक ज्योतिष के अंतर्गत बुध ग्रह को व्यापार और बुद्धि का प्रदाता ग्रह माना जाता है। यह हमारी वाणी के रूप में भी हम पर अपना आधिपत्य रखता है। यदि राशियों के स्वामित्व की बात की जाए तो यह मिथुन और कर्क राशि पर अपना अधिकार रखता है। इसके साथ-साथ कन्या राशि इसकी मूल त्रिकोण राशि तथा उच्च राशि भी मानी गई है। ये मीन राशि में नीच अवस्था में माना जाता है। नक्षत्र क्रम में अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र बुध के ही नक्षत्र हैं।

वक्री बुध का तुला राशि में गोचर

एक राज कुमार के रूप में नवग्रह मंडल में पहला स्थान पाने वाला बुध संचार व्यवस्था का मुख्य अतिथि ग्रह है। यह वात पित्त और कफ तीनों प्रकृति पर समान अधिकार रखता है और इसके बिगड़ने पर व्यक्ति को इन तीनों ही प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। क्योंकि यह राजकुमार है इसमें सीखने की प्रवृत्ति है और यही वजह है कि अच्छी संगति अर्थात अच्छे ग्रहों के साथ शुभ फल और बुरी संगति यथार्थ अशुभ ग्रहों के साथ संबंध बनाने पर कुंडली में यह अ शुभ परिणाम देने में समर्थ होता है। इस की कृपा से व्यक्ति की स्मृति तीक्ष्ण बनती है और शास्त्रों से लेकर गणित और सांख्यिकी तक व्यक्ति को पारंगत बनाता है।

यह दिन और रात दोनों समय समान रूप से बली रहता है और अपनी महादशा के दौरान शुभाशुभ फल पूर्ण दशा अवधि में देता है। बुध का वक्री होना भी ज्योतिष के क्षेत्र में एक विशेष घटना मानी जाती है। जब वाणी और संचार व्यवस्था का कारक बुध वक्री होता है तो बिना किसी वजह के लोगों के झगड़े होने लगते हैं और इससे संबंधित कार्य क्षेत्रों में रुकावटें आनी शुरू हो जाती है। यदि आपकी जन्म कुंडली में भी बुध वक्री अवस्था में विराजमान है तो बुध का वक्री होना आमतौर पर आपके लिए अनुकूल परिणाम देने वाला साबित होता है और इसके विपरीत परिस्थिति होने पर परिणामों में कुछ कमी आ सकती है।

गोचर काल का समय

बुध ग्रह ने 23 अक्टूबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश किया था। जहां 31 अक्टूबर को यह वक्री गति प्रारंभ कर चुका है। इसी वक्री अवस्था में चलते हुए 7 नवंबर बृहस्पतिवार शाम 4:04 पर यह तुला राशि में प्रवेश करेगा और 21 नवंबर को मार्गी होने के बाद पुनः 5 दिसंबर बृहस्पतिवार सुबह 10:23 बजे बजे वृश्चिक राशि में पुनः प्रवेश कर जाएगा।

इस प्रकार बुध के इस वक्री अवस्था में होने वाले गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। तो आईये जानते हैं बुध का प्रभाव आपकी राशि पर किस प्रकार होगा।

Click here to read in English…

यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष राशि

आपकी राशि के लिए बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान वक्री अवस्था में बुध आपके सप्तम भाव में गोचर करेगा। सप्तम भाव हमारे जीवन में होने वाली बड़ी साझेदारियों का भाव है। इसी के आधार पर हमारे जीवन साथी का चयन होता है तथा व्यावसायिक साझेदारी भी इसी से देखी जाती है। इसके साथ-साथ विदेशी व्यापार भी सप्तम भाव के ही कारकत्वों के अंतर्गत आता है। बुध के इस वक्री गोचर का आपके सप्तम भाव पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा जिसके कारण दांपत्य जीवन में तनाव की स्थिति आ सकती है और साथ ही साथ आपके व्यावसायिक साझीदार से आपके संबंध बिगड़ सकते हैं। अपने जीवन साथी से किसी बात पर व्यर्थ ना उलझे और कोई समस्या हो तो उसे मिल बैठकर सुलझाने का प्रयास करें। इसके परिणाम स्वरूप व्यापार में समस्या और घाटे का सामना करना पड़ सकता है। आपके व्यवहार में भी निर्णय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसकी वजह से महत्वपूर्ण निर्णय लेने के समय आप खुद को असहज महसूस करेंगे और इसकी वजह से जीवन में समस्या उत्पन्न हो सकती है। छोटी दूरी की यात्राएं अधिक सफलता दायक साबित नहीं होंगे इसलिए यात्रा के दौरान कष्ट हो सकता है, सावधानी बरतें। अपने विरोधियों के प्रति सावधान और सतर्क रहें तथा इस दौरान किसी से क़र्ज़ न लें और न ही दें।

उपाय: गाय के गोबर से आंगन में लिपाई करें और यदि ऐसा संभव ना हो तो घर में गाय के गोबर पर लोबान और गूगल जलाएं तथा उसका धुंआ पूरे घर में फैलायें।

वृषभ राशि

आपकी राशि के लिए वह दूसरे और पांचवें भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान अपनी वक्री अवस्था में वह आपके षष्टम भाव में प्रवेश करेगा। छठे भाव के द्वारा जीवन में संघर्षों के बारे में पता चलता है। किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता की बात करनी हो अथवा अपने विरोधियों पर विजय पाना हो या किसी मुकदमे में जीतना, इन सभी के लिए छठे भाव का विचार किया जाता है। साथ ही साथ किसी भी प्रकार के रोग तथा कर्ज आदि के बारे में जानने के लिए भी छठा भाव विचारणीय है। छठे भाव में बुध का वक्री गोचर करना किसी बीमारी की ओर इशारा करता है। ऐसे में आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। अपने विरोधियों पर आप भारी पड़ेंगे और कोई नया कर्ज लेकर अपने पुराने कर्ज को चुकाने का प्रयास करेंगे। आपकी संतान के लिए समय उन्नति दायक रहेगा। यदि आप विद्यार्थी हैं तो शिक्षा में अच्छे परिणामों की प्राप्ति होगी और आपकी कठिन मेहनत रंग लाएगी। आकस्मिक ख़र्चों के योग बनेंगे। आपका संजय धन व्यर्थ के वाद विवाद में खर्च हो सकता है तथा किसी पारिवारिक सदस्य की बीमारी पर भी खर्च करने की स्थिति बन सकती है। आप विदेश यात्रा पर जाने का प्रयास इस दौरान कर सकते हैं हालांकि उसमें सफलता मिलने की संभावना थोड़ी कम ही रहेगी। इस दौरान आपके प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव की स्थिति आ सकती है।

उपाय: चितकबरी रंग के कुत्ते को दूध और ब्रेड दें।

मिथुन राशि

बुध ग्रह आपकी राशि का स्वामी होने के साथ-साथ आपके चतुर्थ भाव का स्वामी है और अपने इस गोचर के दौरान वक्री गति से आपके पंचम भाव में प्रवेश करेगा। पांचवा भाव हमारी बुद्धि और ज्ञान की दिशा का निर्धारण करता है। इसी के आधार पर हमारी शिक्षा, हमारे प्रेम प्रसंग और हमारी संतान के बारे में पता चलता है। बुध के पंचम भाव में गोचर करने के कारण आपका मन नई-नई चीजों को सीखने के लिए लालायित होगा और आप इसके लिए अतिरिक्त प्रयास करेंगे। यदि आप विद्यार्थी हैं तो अपने सिलेबस को बार-बार रिवाइज करेंगे तथा शास्त्रों, गणित, सांख्यिकी तथा तार्किक क्षमता पर आधारित विषयों में विशेष दिलचस्पी दिखाएँगे। आप अपनी संतान के प्रति काफी गंभीर रहेंगे और उनकी सफलता को लेकर आप भी अपनी ओर से प्रयास करेंगे। इस गोचर के दौरान आपको अच्छी आमदनी प्राप्त होने के योग बनेंगे और आपका हाथ पैसों से खाली नहीं रहेगा। इस दौरान आपकी माता जी को कोई विशेष लाभ हो सकता है। आप किसी कलात्मक अभिरुचि में अपने हाथ आजमा सकते हैं और इसका आपको सकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा। प्रॉपर्टी संबंधित कोई डील फिलहाल कुछ समय के लिए टाल देना आपके लिए फ़ायदेमंद रहेगा।

उपाय: प्रतिदिन गाय को हरा चारा तथा साथ में थोड़ा सा गुड़ खिलाना आपके लिए बेहतर रहेगा।

कर्क राशि

इस राशि के लोगों के लिए बुध आपकी कुंडली के बारहवें तथा तीसरे भाव का स्वामी है। अपने इस गोचर के दौरान वे आपके चतुर्थ भाव में संचरण करेगा। चतुर्थ भाव हमारे सुख का भाव है और यही हमारी माता के बारे में भी बताता है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की संपत्ति तथा वाहन आदि की स्थिति के बारे में भी इसी भाव से पता चलता है। चतुर्थ भाव में बुध ग्रह की उपस्थिति वह भी वक्री अवस्था में आपके लिए बुध कुछ परेशानियां खड़ी कर सकता है। एक ओर जहां आपकी माताजी का स्वास्थ्य परेशान करेगा, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक जीवन में भी कलह देखने को मिल सकती है। इसकी वजह होगी लोगों का एक दूसरे के प्रति अधिक और बेमतलब का बोलना। इस कारण पारिवारिक जीवन थोड़ा तनावपूर्ण रहेगा। हालांकि कार्य क्षेत्र में आपके सहकर्मी आपके लिए सफलता का मार्ग बनाएँगे। निजी प्रयासों से सफलता मिलेगी। आपको इस दौरान अपने कार्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए और अच्छे से अच्छा प्रदर्शन करना चाहिए क्योंकि इसका परिणाम आपको शीघ्र ही मिलने वाला है। इस दौरान कोई वाहन अथवा प्रॉपर्टी खरीदने में सफलता मिल सकती है तथा विदेशी संपर्कों से लाभ मिलने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

उपाय: हनुमान जी की आराधना करें और उन्हें मंगलवार के दिन मीठा पान अर्पित करें।

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों के लिए बुध ग्रह दूसरे तथा ग्यारहवें भाव का स्वामी है तथा अपने वक्री गोचर के दौरान आपके तृतीय भाव में प्रवेश करेगा। तीसरा भाव हमारे संचार माध्यमों तथा संवाद शैली का भाव है। इस भाव की सहायता से हम अपने छोटे भाई बहनों तथा छोटी दूरी की यात्राओं, हमारे द्वारा किए जाने वाले प्रयासों तथा हमारे साहस और पराक्रम के बारे में पता चलता है। तीसरे भाव में बुध का गोचर होने से आपके प्रयासों में वृद्धि होगी और आप किसी भी काम को करने के लिए अपनी ओर से शत-प्रतिशत प्रयास करेंगे। आप अपने छोटे भाई बहनों की आर्थिक तौर पर मदद भी करेंगे हालांकि उन्हें किसी तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। संचार माध्यमों के द्वारा आपको किसी प्रकार का शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। छोटी दूरी की यात्राएं आपके लिए फायदे का सौदा साबित होंगी और इस दौरान आप काफी आगे तक प्रसन्न चित्त रहेंगे। आपके पिता से आपके संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी और माता-पिता का स्वास्थ्य थोड़ा सा कमजोर रह सकता है। परिवार में किसी पुराने मित्र अथवा रिश्तेदारों का आवागमन हो सकता है जिसके कारण परिवार का वातावरण उत्साह से पूर्ण तथा उल्लासमय बना रहेगा। अपने सहकर्मियों से अच्छा व्यवहार करें अन्यथा व्यर्थ के विरोध में जाकर आपके खिलाफ कोई कार्य कर सकता है, जिसका आपको अच्छा खासा ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

उपाय: रविवार के दिन गाय को कच्चे गेहूं का आटा और थोड़ी-सी चीनी मिलाकर खिलाने से आपके जीवन की समस्याएं दूर होंगी।

कन्या राशि

बुध ग्रह आपकी ही राशि का स्वामी है और साथ ही साथ आपके दशम भाव पर भी आधिपत्य रखता है। अपने इस गोचर के दौरान वह आपके द्वितीय भाव में प्रवेश करेगा। दूसरा भाव हमारी वाणी तथा भोजन का भाव होता है। हम कैसा भोजन खाते हैं और कैसी वाणी बोलते हैं यह सब कुछ दूसरा भाव बताता है और इसी के साथ-साथ हमारे संचित धन तथा हमारे कुटुंब के बारे में भी यही भाव जानकारी देता है। इस भाव में वक्री बुध का गोचर करना पारिवारिक संबंधों में कुछ कड़वाहट उत्पन्न कर सकता है। संभव है कि बात जरा सी भी ना हो और उसका बतंगड़ बन जाए जिसकी वजह से परिवार का वातावरण अशांति पूर्ण हो सकता है। हालांकि आपकी ओर से बात को संभालने का पूरा प्रयास किया जाएगा। आपको धन लाभ होने की अच्छी स्थिति रहेगी और जो पैसा कमाएंगे वह बैंक बैलेंस के रूप में आपके पास इकट्ठा हो सकता है। इस दौरान आप कोई ऐसा कार्य कर सकते हैं जिसकी वजह से परिवार के लोगों में आपकी इमेज अच्छी बनेगी। आप थोड़े पेटू हो सकते हैं उसकी वजह से मोटापा आपको अपनी चपेट में ले सकता है। हालांकि आपका सेंस ऑफ ह्यूमन आपको भीड़ में सबसे अलग दिखाएगा लोग आपके प्रति आकर्षित भी होंगे।

उपाय: शनिवार के दिन सरसों के तेल में अपनी छाया देख कर दान करना अर्थात छाया दान करना आपके लिए बेहतर रहेगा।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए बुध बारहवें तथा नवें भाव का स्वामी है और इस दौरान बुध का गोचर आपके प्रथम भाव में होगा। इसे लग्न भाव भी कहते हैं। प्रथम भाव हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है। इसी के द्वारा हमारा शरीर, समाज में हमारी पहचान तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में भी जाना जा सकता है। आपके लग्न में वक्री बुध का गोचर बार-बार किसी काम के लिए आप से मेहनत करवाएगा। उदाहरण के लिए यदि आप घर में ताला लगाएंगे तो बार-बार उसे चेक करेंगे कि आपने सही ताला लगाया है अथवा नहीं। जहां एक ओर यह आदत आपको लाभ देगी वही आपको मानसिक रूप से तनाव देगी। आप किसी बात को लेकर पक्के तौर पर आशान्वित नहीं रहेंगे जिसका असर आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ेगा। विदेशी स्रोतों से आपको कोई लाभ मिल सकता है। वहीं भाग्य आपका साथ देगा इसलिए जो कोई भी आप कार्य करें उसे पूरे मन से करें, तभी आपको लाभ मिलेगा। आपके कार्यों में पिता और गुरु का सहयोग प्राप्त होगा जिसकी वजह से कुछ कार्य आपके अधिक परिश्रम के बिना ही सफलता प्राप्त करेंगे। इस गोचर की अवधि में आप स्वयं पर भी अच्छा-खासा खर्च कर सकते हैं।

उपाय: छोटी कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सफेद रंग की कोई मिठाई शुक्रवार के दिन बांटें।

वृश्चिक राशि

बुध ग्रह का गोचर आपकी राशि से द्वादश भाव मैं होगा। वह आपके लिए अष्टम तथा एकादश भाव का स्वामी है। बारहवाँ भाव हमारी विदेश यात्राओं को बताने का कारगर माध्यम है। इसकी सहायता से हम अपने जीवन में आने वाले ख़र्चों, हानियों, शयन सुख तथा आध्यात्मिक स्तर को भी जान सकते हैं क्योंकि यह मोक्ष त्रिकोण से संबंधित भाव भी है। इस भाव में बुध की स्थिति आपके ख़र्चों में बेतहाशा वृद्धि कर सकती है जिसकी वजह से आपकी आर्थिक स्थिति का संतुलन बिगड़ सकता है। अचानक से कुछ ऐसी यात्राएं करनी पड़ सकती हैं जिसकी वजह से आपका बजट भी बिगड़ेगा और आपको स्वास्थ्य समस्याएं भी घेर सकती हैं। किसी से वाद-विवाद में उलझना आपके लिए अच्छा नहीं रहेगा तथा आपके विरोधी सरल प्रबल रहेंगे, इसलिए सतर्क रहें।

उपाय: भगवान विष्णु की उपासना श्री विष्णु सहस्रनाम स्त्रोत्र के पाठ के साथ प्रतिदिन करें।

धनु राशि

आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर करने वाला वक्री बुध आपकी राशि के लिए सप्तम और दशम भाव का स्वामी ग्रह है। एकादश भाव जीवन में लाभ का भाव माना जाता है क्योंकि हमारी सभी आकांक्षाएं इसी भाव से देखी जाती हैं। हमें हमारी मेहनत का लाभ कितना मिलेगा तथा हमारे जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा ये इसी भाव से देखा जाता है। यह वृद्धि का भाव भी है। बुध के इस भाव में गोचर करने के दौरान आपको जीवन साथी के माध्यम से आपको कोई लाभ प्राप्त होने का भी प्रबल योग बन रहा है। हालांकि आप किसी अन्य व्यक्ति के प्रेम संबंध में पड़ सकते हैं जिसका प्रभाव आपके दांपत्य जीवन पर प्रतिकूल रूप से पड़ सकता है। कार्य क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग आपको प्राप्त होगा जिससे आपका पद और प्रतिष्ठा बढ़ सकता है। बड़े भाई बहनों के साथ भी आपके संबंध सुधरेंगे और आप की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति होगी। किसी दूरगामी लाभ की प्राप्ति होने की संभावना है जो काफी लंबे समय तक आपकी आमदनी का जरिया बना रहेगा। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है इसकी वजह से आपको और अधिक मेहनत से एकाग्रता के साथ पढ़ाई करनी आवश्यक होगी। संतान के लिए यह गोचर अधिक अनुकूल नहीं होगा इसलिए उनका ध्यान रखें।

उपाय: बृहस्पतिवार के दिन पीपल के पेड़ को छुए बिना जल चढ़ाएं तथा ब्राह्मणों को यथाशक्ति भोजन करवाकर दक्षिणा दें।

मकर राशि

बुध ग्रह का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा तथा वह आपकी राशि से छठे तथा नवम भाव पर अपना अधिकार रखता है। दशम भाव हमारे जीवन में कर्म पर आधिपत्य रखता है और जीवन में हमारे कर्म की दिशा का निर्धारण करता है। इसी के द्वारा हमारी ख्याति भी देखी जाती है। दशम भाव में बुध के प्रभाव के कारण कार्य क्षेत्र में आपकी स्थिति पहले के मुकाबले और भी मजबूत हो जाएगी और आपको मनचाहा कार्य प्राप्त हो सकता है। कुछ ऐसे प्रोजेक्ट होंगे जो केवल आप के वरिष्ठ अधिकारी आपको ही देना पसंद करेंगे क्योंकि उनकी नजर में आपकी छवि काफी अच्छी होगी। कोई मनचाहा ट्रांसफर भी इस दौरान हो सकता है जिसमें आपको खुशी मिलेगी। पारिवारिक जीवन में सुख शांति की वृद्धि होगी और परिवार का वातावरण भी आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। आपने जो आज तक मेहनत की है उसका उचित प्रतिफल आपको इस गोचर के दौरान प्राप्त होगा। कुछ समय पहले कुछ ऐसे कार्य है जो आपके छूट गए हैं उन्हें पूरा करने का समय आ गया है, क्योंकि यही कार्य भविष्य में आपकी उन्नति का रास्ता दिखाएँगे।

उपाय: श्री गणेश जी महाराज की नित्य उपासना करें और उन्हें दुर्वांकुर अर्पित करें।

कुंभ राशि

बुध ग्रह का गोचर वक्री अवस्था में आपके नवम भाव में होगा और वह आपकी राशि के लिए पांचवें तथा आठवें भाव का स्वामी है। नवम भाव हमारे भाग्य का भाव होने के कारण जीवन में भाग्योदय के बारे में बताता है। इसके साथ ही लंबी दूरी की यात्राएं, गुरु तथा मान-सम्मान की प्राप्ति और धार्मिक गतिविधियों के बारे में इसी भाव के द्वारा पता चलता है। अचानक से धन लाभ होने की स्थिति आपके समक्ष आ सकती है अथवा किसी प्रकार की कोई पैतृक संपत्ति इस दौरान आपको प्राप्त हो सकती है। पिता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है इसलिए उनके स्वास्थ्य पर नियमित रूप से ध्यान दें। उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं तो आपकी इच्छा इस दौरान पूरी हो सकती है और किसी अच्छे कॉलेज में दाख़िला भी मिल सकता है। संतान के लिए भी यह समय काफी उन्नति दायक रहेगा। आपके प्रेम प्रसंगों में भी आपको सफलता प्राप्त होगी। आप अपने प्रियतम के साथ किसी सुदूर मनोरंजक यात्रा पर जा सकते हैं जिससे आपके रिश्ते में गहराई आएगी और आपका प्रेम परवान चढ़ेगा।

उपाय: मां दुर्गा की आराधना दुर्गा चालीसा द्वारा करें और बुधवार के दिन छोटी कन्याओं को हरे रंग की चूड़ियाँ भेंट करें।

मीन राशि

आपकी राशि के लिए बुध ग्रह चतुर्थ तथा सप्तम भाव का स्वामी है और अपने इस गोचर के दौरान वह आपके अष्टम भाव में प्रवेश करेगा। अष्टम भाव अनिश्चितताओं का भाव है। इस भाव के द्वारा ही जीवन में अध्यात्म का स्तर तथा अचानक से होने वाली घटनाओं का ज्ञान प्राप्त होता है। यह सबसे रहस्यमय भाव है इसलिए शोध और गूढ़ रहस्यों के प्रति हमारा रुझान भी इसी भाव से देखा जाता है। जहां एक ओर आपको आर्थिक रूप से लाभ प्राप्त होगा तो वहीं दूसरी ओर आपकी मानसिक चिंताओं में वृद्धि होगी और दांपत्य जीवन में भी परेशानियों का समय रहेगा। इस दौरान आपका अपने ससुराल पक्ष के लोगों से मन-मुटाव या बहस बाजी हो सकती है जिसका प्रभाव आपके दांपत्य जीवन पर भी पड़ेगा। अनचाही यात्रा पर जाने की संभावना रहेगी जिसमें आपको स्वास्थ्य कष्ट होने की भी संभावना है। जीवन साथी का स्वास्थ्य पीड़ित रहेगा जिसकी वजह से आपके ख़र्चों में भी वृद्धि होगी।

उपाय: भूरे रंग की गाय को गुड़ और हरा चारा खिलाएं तथा किन्नरों से आशीर्वाद लें।

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिष समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन

एस्ट्रोसेज मोबाइल पर सभी मोबाइल ऍप्स

एस्ट्रोसेज टीवी सब्सक्राइब

रत्न खरीदें

एस्ट्रोसेज डॉट कॉम सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले रत्न, लैब सर्टिफिकेट के साथ बेचता है।

यन्त्र खरीदें

एस्ट्रोसेज डॉट कॉम के विश्वास के साथ यंत्र का लाभ उठाएँ।

फेंगशुई खरीदें

एस्ट्रोसेज पर पाएँ विश्वसनीय और चमत्कारिक फेंगशुई उत्पाद

रूद्राक्ष खरीदें

एस्ट्रोसेज डॉट कॉम से सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले रुद्राक्ष, लैब सर्टिफिकेट के साथ प्राप्त करें।