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शनि कुंभ राशि में वक्री (5 जून 2022)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि कुंभ राशि में वक्री (5 जून 2022) होने जा रहे हैं। समस्त ग्रहों में से शनि देव सबसे मंद गति से चलने वाले न्यायप्रिय और कर्मफल दाता माने गए हैं। जो कर्म और सेवा के कारक होते है और इस कारण इनका प्रभाव जातक के कार्यक्षेत्र (नौकरी और व्यवसाय) को सबसे अधिक प्रभावित करता है। शनि देव की उपस्थिति एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहती है और फिर उसके बाद ही वे अपना गोचर करते हैं। सभी ज्योतिष विशेषज्ञों के लिए शनि बेहद महत्वपूर्ण ग्रह होते हैं और इस कारण ही किसी जातक की कुंडली का अध्ययन करते समय ज्योतिषी कुंडली में शनि की स्थिति विशेष रूप से देखते हैं।

शनि कुंभ राशि में वक्री

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ज्योतिष शास्त्रों में जहां सूर्य को ग्रहों के राजा की उपाधि दी गई है तो वहीं सूर्य पुत्र शनि को ग्रहों की सभा में सेवक का पद प्राप्त है। इसलिए भी शनिदेव का सेवक प्रदाता क्षेत्र पर अपना आधिपत्य होता है। ये ग्रह जातक के लिए मुख्य दंडाधिकारी की भूमिका निभाते हुए जातक को उनके कर्म अनुसार अच्छे एवं बुरे फल देता है। इसके अतिरिक्त जब शनि ग्रह किसी राशि में वक्री हो जाता है तो उसके चेष्टा बल में वृद्धि होती है और इसके कारण ही शनि हर राशि में अपने फलों को और विस्तार पूर्वक देने में समर्थ होते हैं। साथ ही मंद गति का ग्रह होने के कारण भी जब शनि वक्री होता है तब कार्यों में मंदी उत्पन्न होने की आशंका बनती है, जिससे जातक से अधिक मेहनत की मांग रहती है।

शनि की वक्री गति का समय

शनि कुंभ राशि में वक्री 5 जून 2022, रविवार को सुबह 4:14 बजे होंगे। ये देखा गया है कि हर राशि के लिए वक्री शनि का फल अलग-अलग होता है। इस दौरान किसी जातक के लिए वक्री शनि का फल तब अशुभ रहेगा जब दशा और कुंडली में शनि का प्रभाव भी दुर्बल होगा, अन्यथा विशेषज्ञों अनुसार शनि के वक्री होने का कोई बुरा प्रभाव नहीं होता है। ऐसे में आइये अब विस्तार से जानते हैं शनि के कुंभ राशि में वक्री होने का सभी राशियों पर पड़ने वाला ज्योतिषीय प्रभाव।

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यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष

मेष राशि वाले जातकों के लिए शनि देव दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। कुंडली का दशम भाव नौकरी, व्यवसाय और कर्म को दर्शाता है। जबकि एकादश भाव आमदनी, लाभ और सफलता को दर्शाता है। अब 5 जून को शनि का एकादश भाव में वक्री होना मेष राशि के जातक को इस दौरान शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।

शनि की ये वक्री गति आपके करियर को बल देगी और इससे वो जातक जो नौकरी की तलाश कर रहे हैं या अपनी नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, उनके लिए भी यह समय उत्तम रहेगा। कार्यक्षेत्र पर व्यापारी जातकों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। क्योंकि वे इस अवधि में अच्छे अवसर हासिल करेंगे।

आर्थिक पक्ष के लिहाज़ से इस समय आपकी आय में अच्छी वृद्धि होने के पूर्ण आसार दिखाई देंगे। हालांकि अपना वक्री करते हुए शनि आपके पंचम भाव को भी दृष्टि करेंगे। जिस कारण प्रेमी जातकों के बीच कुछ मतभेद होने की आशंका रहेगी। यदि आप विदेश जाने के इच्छुक थे या विदेश में बसना चाह रहे हैं तो आपको इस समय कोई समस्या आ सकती है।

परंतु छात्रों की बात करें तो वो छात्र जो विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण करना चाह रहे थे उन्हें अपने कार्यों व प्रयासों में इस समय कई रुकावटों से दो-चार करना पड़ेगा। साथ ही आईटी व इंजीनियरिंग सेक्टर से जुड़े छात्रों को शनि देव नए अवसर देने का कार्य करेंगे।

उपायः शनि ग्रह के शुभ फलों की प्राप्ति हेतु नियमित रूप से काले कुत्ते को सरसों के तेल की चुपड़ी रोटी खिलाएं।


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वृषभ

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि नौंवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। वैदिक ज्योतिष में नवम भाव जहाँ भाग्य का वहीं दशम भाव करियर और कार्यक्षेत्र का माना जाता है। ऐसे में कुंभ राशि में शनि देव के दशम भाव में वक्री होने से वृषभ राशि वालों को अपने करियर से जुड़े कुछ शुभ समाचार प्राप्त होंगे। वो जातक जो नौकरी बदलने की सोच रहे हैं उनके लिए भी ये अवधि विशेष उत्तम रहने वाली है।

इसके अलावा शनि देव का आपके भाग्य भाव का स्वामी होने के कारण इस स्थिति में आपको अपने भाग्य का भी पूरा सहयोग मिलेगा। इससे आप अपने जीवन में सफलता अर्जित कर सकेंगे। परंतु निजी जीवन में आपके प्रेम संबंधों की बात करें तो, इस समय विवाहित जातकों का अपने साझेदार के साथ किसी कारणवश कोई मतभेद हो सकता है। वहीं यदि आप साझेदारी के व्यवसाय से जुड़े हैं तो आपको थोड़ा सावधान रहने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इस अवधि में आपको व्यापार में नुकसान होने के आसार दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि अपना वक्री करते हुए शनि की दृष्टि आपके सुख-सुविधा के चतुर्थ भाव पर होगी। इसलिए शनि की ये चाल आपके सुख-सुविधाओं में कुछ कमी ला सकती है। कई जातकों का प्रॉपर्टी से संबंधित कोई विवाद होने की आशंका रहेगी। साथ ही आर्थिक जीवन में भी इस दौरान आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होने वाली है। ऐसे में शुरुआत से ही एक सही बजट प्लान के अनुसार ही अपने धन का प्रयोग करें, अन्यथा आशंका है कि कुछ महत्वपूर्ण चीजों पर आप न चाहते हुए भी अपने धन का एक बड़ा भाग खर्च कर देंगे।

उपायः एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखें और फिर उस तेल को मंदिर या गरीबों को दान करें।

मिथुन

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके आठवें और नौंवे भाव के स्वामी हैं। वैदिक ज्योतिष में आठवां भाव किसी बड़े परिवर्तन, दीर्घायु को दर्शाता है जबकि नौंवा भाव भाग्य और शोहरत से संबंधित होता है। ऐसे में अब शनि देव आपके नवम भाव यानी भाग्य भाव में वक्री होंगे। इसके परिणामस्वरूप आपको भाग्य का साथ मिल सकेगा।

परंतु बावजूद इसके आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर शुरुआत से ही अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। खासतौर से वो जातक जो अपनी पूर्व की किसी परेशानी से जूझ रहे थे उनकी समस्या और अधिक बढ़ सकती है। क्योंकि आशंका अधिक है कि आपको अचानक कोई रोग परेशान कर सकता है इसलिए ज़रूरत पड़ने पर तुरंत किसी अच्छे डॉक्टरी की सलाह लें।

इसके अलावा शनि देव अपना वक्री आपके नवम भाव में करते हुए आपके साहस, छोटे भाई-बहन, मानसिक संतुलन, छोटी दूरी की यात्रा आदि के तृतीय भाव को दृष्टि करेंगे। इसलिए इस समय आपके और छोटे भाई-बहनों के बीच कुछ मतभेद की स्थिति उत्पन्न होने के कारण आपका मन कुछ अशांत हो सकता है। इस दौरान आपको हर प्रकार की यात्रा करने से बचना चाहिए, फिर वो चाहे कार्यक्षेत्र से या निजी जीवन से जुड़ी हो। क्योंकि अभी यात्रा से आपको नुकसान संभव है। वहीं छात्रों को अपना साहस दिखाते हुए शिक्षा से जुड़े अपने प्रयासों में बढ़ोतरी करनी होगी।

उपायः शनि देव से अनुकूल परिणामों की प्राप्ति के लिए लोहे का छल्ला अपनी उंगली में धारण करें।


कर्क

कर्क राशि के जातकों के लिए शनि आपके सातवें और आठवें भाव के स्वामी होते हैं। वैदिक ज्योतिष में सातवां भाव जीवनसाथी और साझेदारी से जुड़ा है जबकि आठवां भाव किसी बड़े परिवर्तन और दीर्घायु से संबंधित होता है। ऐसे में अब शनि देव आपके अष्टम भाव में वक्री होंगे। अष्टम भाव में शनि का वक्री होना कई जातकों को अपने कुछ पुराने रोग दे सकता है और इससे आपकी समस्या और अधिक बढ़ जाएगी। इसलिए आपको शुरुआत से ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए छोटी से छोटी समस्या को भी नज़रअंदाज़ न करने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा योग ये भी बन रहे है कि आप अचानक किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं। ऐसे में खासतौर से वाहन चलाते समय या सड़क पर चलते समय विशेष सतर्कता बरतें। हालांकि निजी जीवन के लिए समय थोड़ा बेहतर ही रहने वाला है। खासतौर से यदि आप शादीशुदा हैं तो आपको इस समय सामान्य से उत्तम फल मिलेंगे। साथ ही अष्टम भाव में शनि की वक्री अवस्था कर्क राशि के शत्रुओं व विरोधियों का नाश भी करने के योग बनाएगी।

वहीं वो जातक जो विदेश जाने के इच्छुक थे उन्हें भी इस समय शनि देव की कृपा से अपने प्रयासों में सफलता मिलने से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने की संभावना अधिक रहने वाली है।

उपायः शनिवार के दिन विशेष रूप से काले रंग की चीजों का दान करें।


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सिंह

सिंह राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके छठें और सातवें भाव के स्वामी होते हैं। ज्योतिष में जहां छठवां भाव जातक के संघर्ष, शत्रु और बीमारियों से संबंधित होता है वहीं सातवां भाव जीवनसाथी और साझेदारी से संबंधित माना जाता है। ऐसे में 5 जून को शनि कुंभ राशि में वक्री होते हुए आपके सप्तम भाव में वक्री होंगे। इसके परिणामस्वरूप सबसे अधिक आपके वैवाहिक जीवन में कुछ समस्या उत्पन्न होने की आशंका रहेगी। क्योंकि शनि देव आपके और जीवनसाथी के बीच मतभेद या कोई गलतफहमी उत्पन्न कर सकते हैं।

इसके अलावा आपको इस समय अपने शत्रुओं और विरोधियों के प्रति भी विशेष सावधानी बरतते हुए अपना बचाव करने की आवश्यकता होगी। परंतु जो जातक विदेश जाने के इच्छुक हैं उन्हें शनि देव भाग्य का साथ देने वाले हैं।

अब बात करें छात्रों की तो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को शनि देव की इस वक्री अवस्था के चलते पहले से अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होगी। साथ ही ये वक्री सिंह राशि के जातकों को करियर से संबंधित कई लाभ मिलने के योग भी दर्शा रहा है। व्यापारी जातक भी इस समय शनि देव की कृपा से अपने व्यवसाय में अचानक धन की प्राप्ति करने में सफल रहेंगे। परंतु बावजूद इसके आपको इस समय विशेष रूप से अपना धन किसी को भी उधार देने से बचने की भी सख्त सलाह दी जाती है।

उपायः नियमित रूप से पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दिया ज़रूर जलाएं।

कन्या

कन्या राशि के जातकों के लिए शनि आपकी राशि में पांचवें और छठवें भाव के स्वामी होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पांचवां भाव शिक्षा और बच्चों से संबंधित है जबकि छठवां भाव संघर्ष, शत्रु और रोग के बारे में जानकारी देता है। ऐसे में अब शनि देव आपके षष्टम भाव यानी शत्रु व रोग भाव में वक्री होंगे। इसलिए इस दौरान कन्या राशि के जातकों को उनकी कोई पुरानी बीमारी पुनः परेशान कर सकती है।

हालांकि सकारात्मक पक्ष पर बात करें तो शनि के वक्री होने के दौरान कन्या राशि के जातकों को सट्टाबाज़ारी और अटकलों के माध्यम से अच्छा लाभ मिलने के प्रबल योग भी बनते नज़र आ रहे हैं। इसके अलावा बात करें करियर के लिहाज से तो इस संबंध में उचित प्रयास करने और कार्यक्षेत्र पर अपनी अच्छी पहचान बनाने के लिए शनि की यह वक्री स्थिति आपके लिए शानदार रहने वाली है।

इसके अलावा इस समय कुंभ राशि में शनि वक्री करते हुए आपके अष्टम भाव (आयु, खतरा, दुर्घटना), द्वादश भाव (खर्चा, नुकसान, मोक्ष) और तृतीय भाव (साहस, छोटे भाई-बहन, मानसिक संतुलन) को दृष्टि करेंगे। जिसके परिणामस्वरूप ये वक्री जातकों को आर्थिक जीवन से संबंधित कई परेशानियां भी देने के योग बनाएगा। साथ ही आप अपने छोटे भाई-बहनों का सहयोग नहीं प्राप्त कर सकेंगे। कई जातकों के साथ किसी प्रकार की दुर्घटना होने की भी आशंका रहेगी।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखें तो शनि देव आपको छाती या पेट से संबंधित कुछ रोग भी दे सकते हैं। इसके कारण आप अपच, गैस, एसिडिटी आदि समस्याओं से पीड़ित रहेंगे। इसलिए आपको इस वर्ष बाहर के खाने से परहेज करते हुए केवल और केवल घर का बना खाना ही खाने की सलाह दी जाती है।

शनि के वक्री होने के दौरान कन्या राशि के जातकों को विरासत के माध्यम से कमाई के अच्छे अवसर मिलने के भी योग बन रहे हैं। यानि कि कुलमिलाकर देखा जाए तो वक्री शनि कन्या जातकों के जीवन में अच्छे बुरे दोनों ही परिणाम लेकर आने वाला है।

उपायः हर शनिवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।

तुला

तुला राशि वालों के लिए शनि ग्रह आपकी राशि के चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चौथा भाव माता, वाहन और जीवन में खुशी को दर्शाता है जबकि पंचम भाव शिक्षा और बच्चों से संबंधित है। शनि आपका योग कारक ग्रह भी है जिसका आपके जीवन में बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है।

इस वर्ष 5 जून को शनि देव आपके पंचम भाव यानी शिक्षा और प्रेम के भाव में वक्री होंगे। इस कारण इस समय तुला राशि के विद्यार्थियों का मन अपनी पढ़ाई से कुछ भटक सकता है। प्रेम संबंधों के लिहाज़ से प्रेम में पड़े जातकों के बीच भी शनि देव मतभेद की स्थिति पैदा कर सकते हैं। जिसके परिणामस्वरूप आपके और प्रेमी के बीच किसी छोटी सी बात को लेकर कहासुनी संभव है।

इसके अलावा कुंभ राशि में शनि देव अपना वक्री करते हुए इस दौरान पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ आपके संबंधों में समस्या भी लेकर आ सकते हैं। इसके कारण घर-परिवार में अशांति का वातावरण आपको तनाव देगा। ऐसे में अपने पारिवारिक सुख को बनाए रखने के लिए आपको कामकाज और गृहस्थ जीवन के बीच सही संतुलन बनाकर चलने की सख्त ज़रूरत होगी। साथ ही शनि देव का आपकी राशि में प्रभाव आपकी माता जी के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करने वाला है। इसलिए उनकी सही देखभाल करना भी इस समय आपके लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

उपायः शनिवार को बंदरों और काले कुत्तों को लड्डू खिलाए।

वृश्चिक

शनि ग्रह आपकी राशि के तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का तीसरा भाव प्रयास, संचार और भाई-बहन आदि से संबंधित होता है जबकि चौथा घर माता, वाहन और खुशियों को दर्शाता है। ऐसे में इस वर्ष 5 जून को शनि आपके चतुर्थ भाव में वक्री होंगे। इसलिए इस वक्री के दौरान आपके अपनी मां के साथ संबंध कुछ बिगड़ सकते हैं। घर-परिवार में भी किसी जमीन या संपत्ति से संबंधित कोई पुराना विवाद पुनः बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप आपको शनि देव इस समय सबसे अधिक कुटुम व अपने परिवार से जुड़ी कई परेशानियां देने के योग बनाएंगे।

परंतु करियर के लिहाज़ से समय बेहतर रहने वाला है। संभावना अधिक है कि शनि देव की कृपा से आपको अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित कोई शुभ समाचार प्राप्त हो। यदि आप व्यापारी हैं तो भी ये अवधि आपके लिए अनुकूलता लेकर आ रही है। क्योंकि इस समय आप व्यापार में अपनी मेहनत से अचानक से कोई अच्छा लाभ प्राप्ति करेंगे।

हालांकि शादीशुदा जातकों को कष्टों से दो-चार होना पड़ेगा। खासतौर से आपका अपने जीवनसाथी के साथ संतान को लेकर कुछ विवाद संभव है। लेकिन सभी विवाद और मतभेद के बावजूद भी आप दोनों एक दूसरों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखते हुए अपने बीच आ रही सभी परेशानियों को दूर करने में सफल भी रहने वाले हैं। इसके लिए आप स्वयं शुरुआत करते हुए एक दूसरों के साथ अच्छा समय भी व्यतीत करते दिखाई देंगे।

उपायः जीवन में सफलता पाने के लिए अपनी कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा करें।

धनु

धनु राशि के लोगों के लिए शनि देव उनकी राशि में दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दूसरा भाव धन, परिवार और भाषा से संबंधित है जबकि तीसरा भाव भाई-बहन, प्रयास और संचार को दर्शाता है। ऐसे में इस समय शनि आपके तृतीय भाव में वक्री होंगे। इसलिए इस वक्री से आपको अपने भाई-बहनों का पूर्ण रूप से सहयोग प्राप्त होता दिखाई देगा।

परंतु बावजूद इसके शनि देव इस समय आपके कुटुम में कुछ परेशानियां भी दे सकते हैं। जिसके कारण आपके घर-परिवार में शानि का अभाव आपको कष्ट देगा। इसके अलावा कुंभ राशि में शनि देव का वक्री होने से शनि की दृष्टि आपके भाग्य स्थान पर भी पड़ेगी। इसके परिणामस्वरूप धनु राशि के जातकों को इस समय भाग्य का साथ भी मिलता हुआ दिखाई देगा।

खासतौर से वो छात्र जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं उन्हें ये अवधि अनुकूलता देने के योग बनाएगी। साथ ही शनि देव की कृपा से आप अपने करियर में भी सफलता अर्जित करेंगे।

उपायः पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए अपने माता-पिता की सेवा करें।


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मकर

मकर राशि के जातकों के लिए शनि देव आपके राशि स्वामी होने के साथ-साथ आपके दूसरे भाव के स्वामी भी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में लग्न भाव से हम व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और दीर्घायु का पता लगाते हैं। जबकि दूसरे भाव से धन, परिवार और भाषा का ज्ञात होता है। अब 5 जून को शनि देव आपके कुटुम यानी परिवार के दूसरे भाव में वक्री होंगे। इससे सबसे अधिक आपका पारिवारिक जीवन प्रभावित रहेगा।

शनि की ये स्थिति आपके घर-परिवार में वाद विवाद की स्थिति का कारण बनेगी। इस दौरान आशंका ये भी है कि घर के सदस्यों में भाईचारे की कमी होगी और वे एक दूसरों के विपरीत खड़े दिखाई देंगे।

परंतु विदेश से जुड़े जातकों को शनि देव अनुकूल परिणाम देने वाले हैं। इसके अलावा शनि देव इस दौरान आपके दूसरे भाव में वक्री करते हुए आपके अष्टम भाव को पूर्ण रूप से दृष्टि करेंगे। इसके परिणामस्वरूप आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। साथ ही आपको अपनी स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियों से भी काफी हद तक निजात मिल सकेगी।

हालांकि प्रेम संबंधों में शनि देव प्रेमी जातकों की परीक्षा लेते हुए उनके बीच कुछ विवाद या गलतफहमी उत्पन्न कर सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने साथी से सच्चा प्रेम करते है तो आप इस परीक्षा में विजयी होते हुए हर गलतफहमी को दूर कर एक दूसरों का मान-सम्मान करेंगे। इस दौरान कई प्रेमी जातक प्रियतम को अपने घरवालों से मिलाने का भी प्लान कर सकते हैं।

उपायः हर शनिवार के दिन श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना आपके लिए उचित रहेगा।

कुम्भ

कर्मफल दाता शनि देव आपके लग्न भाव यानी प्रथम भाव के स्वामी होने के साथ-साथ आपके बारहवें भाव के भी स्वामी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लग्न भाव से व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और दीर्घायु का पता चलता है जबकि द्वादश भाव हानि, खर्च, अस्पताल और सुख-सुविधाओं से संबंधित माना गया है। अब शनि देव आपकी ही राशि यानी आपके लग्न भाव में वक्री होंगे। इस कारण आपको शनि देव कई प्रकार की मानसिक परेशानियां देने के योग बनाएंगे।

यूँ तो आप मानिसक रूप से कुछ बेचैन नज़र आएंगे लेकिन बावजूद इसके आप अपनी समझदारी से इस प्रतिकूल परिस्थिति से भी खुद को निकालने में सक्षम रहने वाले हैं। साथ ही शनि देव की ये वक्री अवस्था आपके वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करेगी और इसके परिणामस्वरूप आपको अपने जीवन में जीवनसाथी का सही सहयोग की आवश्यकता होगी। पारिवारिक जीवन में भी ये समय आपको छोटे भाई-बहनों का सहयोग देगा।

इसके अलावा शनि देव इस समय आपके प्रथम भाव में होते हुए आपके करियर को भी दृष्टि करने वाले हैं। इस कारण आप अपने कार्यक्षेत्र पर उन्नति करते हुए अपने करियर से संबंधित शुभ अवसर प्राप्त करने में सफल होंगे। वहीं छात्रों की बात करें तो वो छात्र जिन्हें परीक्षा के परिणामों का इंतज़ार था उन्हें भी अपनी परीक्षा में अच्छे अंक हासिल होंगे।

उपायः अपने वजन के बराबर अनाज का दान किसी आश्रम में करें।


आपकी कुंडली में भी है राजयोग? जानिए अपनी राजयोग रिपोर्ट

मीन

शनि देव आपकी राशि के लिए ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एकादश भाव जहां आय से संबंधित होता है वहीं बारहवें भाव से हम हानि का ज्ञात करते हैं। अब यही शनि ग्रह आपके व्यय भाव यानी द्वादश भाव में वक्री होंगे और इसलिए इस दौरान आपके ख़र्चों में बढ़ोतरी देखी जाएगी। बढ़ते खर्चे सबसे अधिक आपके आर्थिक जीवन को प्रभावित करेंगे और इससे आपको कुछ हद तक धन से जुड़ी समस्या हो सकती है।

इसके अलावा शनि की दृष्टि का आपके रोग भाव पर होना आपको अपनी सेहत के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। इसलिए इस दौरान यदि आपको स्वास्थ्य से संबंधित कोई परेशानी हो तो बिना देरी किये तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

साथ ही शनि देव की दृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव व्यापारी जातकों पर पड़ेगा। क्योंकि इस समय उन्हें निवेश के लिए धन का अभाव महसूस हो सकता है और इस कारण वे ज्यादा ब्जाय के साथ कोई ऋण या कर्ज लेने का प्लान भी करेंगे। हालांकि ये कर्ज भविष्य में चुकाना आपके लिए परेशानी का कारण भी बन जाएगा। साथ ही शत्रुओं पर भी नज़र बनाकर रखें, अन्यथा वो आपके खिलाफ षडयंत्र करते हुए आपको हानि पहुंचा सकते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो इस वक्री के दौरान आपको सबसे अधिक अपनी फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हुए अपना धन संचय करने की सलाह दी जाती है। वहीं शादीशुदा जातकों को भी घर पर शांति बनाए रखने के लिए धैर्य से काम लेने की ज़रूरत होगी।

उपायः प्रतिदिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना आपके लिए विशेष अनुकूल रहेगा।


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