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इष्ट देवता

ईश्वर की कृपा जीवन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हीं की कृपा से हमें जीवन में सुख शांति की प्राप्ति होती है, हम समृद्धिवान होते हैं और हमें दुखों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। अब ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर हमारे इष्ट देवी या देवता कौन हैं और हमें किन की पूजा करनी चाहिए जिससे हमारे सभी दुखों का अंत हो सके। इस प्रश्न का सही उत्तर वैदिक ज्योतिष की सहायता से हमारे इस कैलकुलेटर के माध्यम से आपके लिए लेकर आए हैं। ज्योतिष के अंतर्गत कुंडली के विभिन्न भाव और उनमें उपस्थित ग्रहों की स्थिति के आधार पर हम आपके इष्ट देवी अथवा देवता के बारे में आसानी से बता सकते है।

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इष्ट देव की पूजा का महत्व

यूँ तो हम अपनी इच्छा और श्रद्धा के अनुसार किसी भी देवी देवता की पूजा कर सकते हैं, लेकिन अपने इष्ट की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उनका संबंध हमारे कर्मों से और हमारे जीवन से होता है। यदि व्यक्ति को जीवन में सफलता अर्जित करनी है तो उनका इष्ट प्रबल होना चाहिए अर्थात उनका इष्ट उनसे प्रसन्न होना चाहिए और इसी लिए आपको भी इस कैलकुलेटर के माध्यम से अपने इष्ट को जानकर उनकी उपासना करनी चाहिए। इष्ट देव की पूजा अर्चना करने से हमारे आत्म बल में वृद्धि होती है और हमारी कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष मौजूद हो हमारे इष्ट देव यदि हमसे प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष हमें अधिक परेशान नहीं करते।

आपके इष्ट देवी / देवता कौन हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत इस इष्ट देवता कॅल्क्युलेटर के माध्यम से हमने एक ऐसी व्यवस्था दी गई है जिसके आधार पर आप ये जान सकते हैं कि आपके इष्ट देवी अथवा देवता कौन है और आपको किनकी पूजा करनी चाहिए। जन्म कुंडली के अनुसार हमारा ये इष्ट देवता कॅल्क्युलेटर आपके इष्ट को बताने में सहायक हैं जिनके आधार पर कोई भी अपने इष्ट को पहचान सकता है।

जैमिनी ज्योतिष के अनुसार आत्म कारक के आधार पर जातक के इष्ट देवता का निर्धारण किया जाता है। हमारी जन्म कुंडली में जो ग्रह सबसे अधिक अंशों पर होता है उसे आत्म कारक माना जाता है। आत्म कारक नवांश वर्ग कुंडली में जिस राशि में स्थित होता है उसे कारकांश लग्न कहा जाता है। इष्ट देव का निर्धारण करने के लिए हमें यह देखना होता है कि कारकांश लग्न से बारहवें भाव में स्थित राशि कौन सी है और उसका स्वामी ग्रह कौन है, उसी से संबंधित देवी देवता ही हमारे इष्ट देवी-देवता होते हैं।

इस पद्धति के अनुसार पर इष्ट देवता का निर्धारण करने के लिए जो भी ग्रह आता है उसके अनुसार देवी देवता की जानकारी पर आधारित कुल देवता की पहचान की जाती है। आइये अब जानते हैं कि कारकांश लग्न से बारहवें भाव से सम्बन्ध बनाने वाला ग्रह निम्नलिखित हो तो हमें किस देवी देवता की पूजा करनी चाहिए:

ग्रह एवं उनसे संबंधित देवी - देवता:

  • सूर्य ग्रह

आपको भगवान शिव अथवा श्री महाविष्णु जी के अवतार श्री राम जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए।

  • चंद्र ग्रह

आपको माता सरस्वती अथवा भगवान हरि विष्णु के अवतार श्री कृष्ण जी की पूजा करनी चाहिए।

  • मंगल ग्रह

आपको भगवान कार्तिकेय, श्री मुरुगन स्वामी अथवा भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए।

  • बुध ग्रह

आपके लिए भगवान हरि विष्णु जी अथवा श्री थिरुमल जी की पूजा अर्चना करना हितकर रहेगा।

  • बृहस्पति ग्रह

आपको भगवान दत्तात्रेय को मानना चाहिए। साथ ही आप भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा भी कर सकते हैं।

  • शुक्र ग्रह

आप माता महालक्ष्मी अथवा माता पार्वती की पूजा अर्चना कर सकते हैं।

  • शनि ग्रह

आपके लिए भगवान ब्रह्मा जी अथवा श्री अयप्पा स्वामी जी की पूजा करना बेहतर रहेगा।

  • राहु ग्रह

आपके लिए माता दुर्गा की पूजा सर्वश्रेष्ठ साबित होगी।

  • केतु ग्रह

आपको भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।

पंचम भाव पद्धति से भी होते है इष्ट देवता

इस पद्धति के अतिरिक्त एक अन्य अधिक मान्य पद्धति है आपकी जन्म कुंडली के पंचम भाव के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण करना। पंचम भाव हमारे पूर्व जन्म के कर्म और विश्वास का द्योतक होता है। इसलिए अपने विभिन्न पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर उनसे संबंधित देवी देवता की पूजा करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

इस पद्धति के अनुसार जन्म कुंडली के पंचम भाव में जो ग्रह स्थित होता है उसे संबंधित देवी / देवता हमारे इष्ट होते हैं। यदि कोई भी ग्रह पंचम भाव में स्थित ना हो तो पंचम भाव के स्वामी अथवा पंचम भाव में स्थित राशि के आधार पर इष्ट देव की पहचान कर सकते हैं। लेकिन आजकल पंचम भाव पद्धति की जगह ज्योतिष विशेषज्ञ जैमिनी ज्योतिष पद्धति का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित समझते हैं क्योंकि जैमिनी ज्योतिष पद्धति के परिणाम ज्यादा सटीक आते हैं।

वास्तव में इष्ट देव की शक्तियों हमारे अंतर में विराजमान होती हैं हमें केवल उनको पहचान ना होता है और उसके लिए उनकी पूजा करने से हमारा संबंध उनसे जुड़ जाता है। ऐसा करने से हमें अपने इष्ट की कृपा मिलती है और जीवन में सफलता की ऊंचाइयां प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है।

अब प्रश्न यह उठता है कि जिस व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली के बारे में पता ना हो तो उसे अपने इष्ट देवता की पहचान कैसे होगी। इसका एक सीधा सा जवाब यह है कि आपका इष्ट आपके अंदर ही मौजूद है, आवश्यकता है तो उसे पुकारने की। जब कभी बिना किसी कारण आपका मन ईश्वर के किसी भी स्वरूप की ओर सबसे अधिक आकर्षित होता है या किसी देवी अथवा देवता विशेष की पूजा करने की और आपका मन लालायित होता है तो आपको उस वक़्त समझने की ज़रुरत है कि वही आपके कुल देवता अथवा इष्ट देवी हैं और उनकी आराधना करके आप अपने जीवन को समस्याओं से मुक्त बना सकते हैं।

हम आशा करते हैं कि हमारा इष्ट देवता कैलकुलेटर आपको पसंद आया होगा और इसकी मदद से आप अपने इष्ट देवी-देवता को जानकर और उनकी उपासना करके अपने जीवन को सफल बनाने में कामयाब रहेंगे।

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