जन्म पत्रिका - Janam Patrika in Hindi

जन्म पत्रिका (Janam Patrika) वो ज्योतिषीय पत्रिका होती है, जिसे व्यक्ति के जन्म तिथि, जन्म स्थान और जन्म समय के आधार पर तैयार किया जाता है। इसके लिए उस विशेष समय और स्थान के अक्षांश के आधार पर अंतरिक्ष में ग्रहों और नक्षत्रों की विभिन्न राशियों में स्थिति के आधार पर बनाया जाता है। इस पत्रिका में विभिन्न तथ्यों का समावेश होता है। वास्तव में ये एक तरह का मानचित्र होता है जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों को पृथ्वी के सापेक्ष देखकर बनाया जाता है। इसमें वर्णित ग्रह और नक्षत्रों की राशिगत स्थिति के माध्यम से ही जातक के संपूर्ण जीवन के बार में जाना जा सकता है।

यह जन्म पत्रिका आपको हमारे ज्योतिष ऑनलाइन पोर्टल पर बिलकुल नि:शुल्क मिलती है।

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जन्म पत्रिका क्या है ?

जन्म पत्रिका निःशुल्क सॉफ्टवेयर के बारे में विस्तृत से जानकारी देने से पहले, आपको हम ये समझा देते है कि आखिर जन्म पत्रिका किसे कहते हैं? वैदिक ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति के जन्म की सटीक तिथि , समय और जन्म स्थान का बहुत महत्व है, जिसके आधार पर एक चार्ट अथवा पत्री बनाई जाती है। इसमें जातक के जन्म के समय विभिन्न राशियों, ग्रहों जैसे सूर्य, चंद्रमा, आदि और नक्षत्रों की स्थिति को निर्धारित कर अहम गणना होती है।

व्यक्ति के जन्म के उपरान्त उसकी जन्म तिथि व समय के अनुसार तैयार की गई जन्म पत्रिका से ही हम उसके सभी ज्योतिषीय पहलुओं और जीवन की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का पता लगाते हुए जातक को उसके जीवन में आने वाले सभी सुख और दुःख के बारे में पहले से सावधान कर सकते हैं। आमतौर पर इसे बनाने के लिए किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी की मदद लेनी पड़ती है, क्योंकि कुंडली निर्माण कोई सरल कार्य नहीं होता है। सही गणना के आधार पर ज्योतिषी इसे तैयार कर किसी भी व्यक्ति को सफलता का रास्ता दिखा सकते हैं।

जन्मपत्री को मुख्य रूप से 12 भागों में विभाजित किया जाता है, जिसे हम घर या भाव भी कहते हैं। ये सभी बारह भाव विशेष रूप से व्यक्ति के जीवन के पारिवारिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, वैवाहिक और प्रेम जीवन, आदि जैसे सभी पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। जन्म पत्रिका अथवा कुंडली में ग्रहों की स्थिति ही एक व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करने और उससे जुड़ी हर जानकारी देने में मददगार साबित होती है।

जन्म पत्रिका के 12 भाव और उनके कारकत्व

संख्या भाव भाव के कारकत्व
1. प्रथम जन्‍म और व्‍यक्ति का स्‍वभाव
2. द्वितीय धन, नेत्र, मुख, वाणी, परिवार
3. तृतीय साहस, छोटे भाई-बहन, मानसिक संतुलन
4. चतुर्थ माता, सुख, वाहन, प्रापर्टी, घर
5. पंचम संतान, बुद्धि
6. षष्ठम रोग, शत्रु और ऋण
7. सप्तम विवाह, जीवनसाथी, पार्टनर
8. अष्टम आयु, खतरा, दुर्घटना
9. नवम भाग्‍य, पिता, गुरु, धर्म
10. दशम कर्म, व्यवसाय, पद, ख्‍याति
11. एकादश लाभ, अभिलाषा पूर्ति
12. द्वादश खर्चा, नुकसान, मोक्ष

जन्मपत्रिका में दर्शाए गए 12 भाव जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित होते हैं इसलिए ही प्रत्येक भाव या घर का महत्व व्यक्ति के जीवन का अध्ययन करने के लिए विशेष आवश्यक होता है।

सरल शब्दों में समझें तो यदि किसी की पत्री के 12 भाव में ग्रहों की स्थिति मजबूत यानि शुभ हो तो इसके प्रभाव से उस व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है। जबकि इसके विपरीत यदि किसी भी भाव पर ग्रहों की स्थिति कमज़ोर हो या कोई भाव किसी पाप ग्रह से प्रभावित होता है तो जातक को उस भाव से संबंधित विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में ये कहा जा सकता है कि ज्योतिष में जन्म पत्रिका के 12 भाव या घर, मनुष्य के संपूर्ण जीवन चक्र को दर्शाते हैं इसलिए इसमें उल्लेखित इन सभी बारह भावों को इस तरह से प्रदर्शित किया जाता है, जिससे हमें जातक के जीवन का सही आंकलन करने में मदद मिलती है।

जन्म पत्रिका क्यों है बेहद आवश्यक?

  • कुंडली से आप निःशुल्क अपने जीवन में आने वाली अनुकूल और प्रतिकूल अवधि के बारे में जान सकते हैं।
  • इसकी मदद से जन्म तिथि, स्थान और समय पर आधारित अपने व्यक्तित्व की संपूर्ण जानकारी और जीवन के पहलुओं की भविष्यवाणियों के साथ-साथ उससे जुड़े उपाय भी प्राप्त कर सकते है।
  • इससे आपको अपने करियर का सही चयन कर, अपनी जन्म पत्रिका में मौजूद विभिन्न ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव भी जानने में मदद मिलती हैं।
  • इसकी मदद से अपने मूल, भाग्य, नाम, शुभ और अशुभ अंक को जानें।
  • जीवन के विभिन्न दोषों और योगों के साथ ही, सही जीवनसाथी का चयन भी आप कर पाते हैं।
  • आपको भविष्य में होने वाले सभी रोगों और शारीरिक पीड़ा की जानकारी भी मिलती है।

जन्म पत्रिका (Janam Patrika) बनाना हुआ अब बेहद आसान

प्राचीन काल से ही हिन्दू परंपरा अनुसार, शिशु के जन्म के बाद ही उसके अभिभावक किसी अनुभवी या विशेषज्ञ ज्योतिषी की मदद से सबसे पहले बालक की जन्म पत्रिका बनवाते हैं। पुरोहित या ज्योतिषी उस शिशु के जन्म की तारीख, स्थान और समय की सही गणना कर उसे तैयार करते हैं लेकिन आजकल के इस आधुनिक युग में बहुत से लोग समय की कमी के कारण बच्चे के जन्म के बाद इसे बनवाना भूल जाते हैं और जब उन्हें अपने जीवन में बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, तब उनमें जन्मपत्री की मदद से अपने जीवन के बारे में जानने की इच्छा जागृत होती है। परंतु इसके लिए किस ज्योतिषी के पास जाएँ, इस बात की उलझन उन्हें परेशान करती है।

अब आपकी इसी परेशानी को समझते हुए एस्ट्रोसेज आपके लिए एक ऐसा सॉफ्टवेयर लेकर आया है, जिसकी मदद से आप घर बैठे ही निःशुल्क अपनी पत्री बना सकते हैं। इसके लिए केवल आपको ऊपर दिए गए “एस्ट्रोसेज कुंडली” फॉर्म को भरना होता है, जिसके बाद ही आप तुरंत अपनी व्यक्तिगत और विस्तृत जन्म पत्रिका प्राप्त कर सकते हैं, वो भी सरल भाषा में।

अक्सर पूछे जानें वाले प्रश्न

  1. जन्म पत्रिका कैसे बनती है?

जन्म पत्री बनाने के लिए एप्लीकेशन में जातक के जन्म की तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान की जानकार देते ही, कंप्यूटर अपने आप गणना करके सही जन्मपत्री का निर्माण कर देता है। पौराणिक काल में जब कंप्यूटर नहीं होते थे, ये गणना ज्योतिषियों को स्वयं ही करनी होती थी, जिसमें काफी समय तो लगता ही था साथ ही गलती होने की आशंका भी अधिक होती थी इसलिए आज ज़्यादातर हर ज्योतिषी, व्यक्ति की जन्म पत्रिका बनाने के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर की मदद लेते हैं।

  1. जन्मपत्री बनाने के लिए सबसे अच्छा सॉफ्टवेयर या एप्प कौन-सी है?

जन्म पत्रिका बनाने के लिए एस्ट्रोसेज का निःशुल्क ज्योतिष एप्प गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसकी मदद से अब कोई भी घर बैठे, बिना किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की सहायता के ही, मिनटों में अपनी जन्मपत्री बना सकते हैं। आप इस एप्प को एंड्राइड अथवा iOS फोन में भी डाउनलोड कर सकते हैं।

  1. बिना जन्म समय के क्या जन्म पत्रिका बनाई जा सकती है?

जी हाँ, आप बिना सही जन्म समय के भी अपनी पत्रिका बनवा सकते हैं। इसके लिए प्रश्न के द्वारा अंक बोलकर प्रश्न कुंडली की मदद से जन्मपत्री का निर्माण किया जाता है लेकिन वह आपकी वास्तविक जन्म कुंडली नहीं होती बल्कि प्रश्न विशेष का उत्तर देने के लिए बनायी गयी प्रश्न कुंडली होती है।

  1. लग्न पत्रिका और जन्म पत्रिका में क्या अंतर है?

वैदिक शास्त्र में लग्न पत्रिका और जन्म पत्रिका को एक समान माना गया है। अलग-अलग भाषा में लोग इसे विभिन्न नामों से जानते हैं जैसे: कुंडली, जन्म कुंडली,लग्न कुंडली या जन्म लग्न आदि।

  1. क्या जन्म पत्रिका बदलती है?

व्यक्तिगत जन्म पत्रिका हर व्यक्ति के जन्म विवरण जैसे: जन्म तिथि, जन्म समय, जन्म स्थान के आधार पर ही तैयार की जाती है, जो कभी नहीं बदलती हैं।

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