बुध का गोचर

वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह बुद्धि, ज्ञान, अभिव्यक्ति एवं संवाद का कारक है। यह मिथुन एवं कन्या राशि का आधिपति होता है। बुध सामान्यत: शुभ ग्रह माना जाता है। हालांकि बुध का स्वभाव तटस्थ होता है। परंतु यह शुभ ग्रहों के साथ अच्छा फल देता है जबकि क्रूर ग्रहों के साथ अशुभ फल देता है। यदि जातक की कुंडली में बुध सूर्य के साथ किसी एक भाव में निकटतम दूरी पर विराजमान हो तो यह सूर्य के संपर्क में आकर बुधादित्य योग का निर्माण करता है जिससे जातक ज्ञानी और बुद्धिमान होता है। बुध के गोचर के दौरान शिक्षा, गणित और वाणिज्य क्षेत्र से संबंधित नौकरी से संबंधित जातकों को लाभ मिलता है। आपकी कुंडली में बुध की स्थिति इस बात का संकेत देती है कि आपके संबंध माता, बहन, चाची, बुआ, मामी एवं मौसी के साथ किस प्रकार के होंगे। सामान्य रूप से बुध के गोचर को शुभ माना जाता है। तक़रीबन एक महीने में बुध अपनी गोचरीय अवस्था में आता है। आइये जानते हैं सभी राशियों पर बुध के गोचर का प्रभाव।

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