शनि का गोचर

सामान्य रूप से शनि ग्रह की हलचल को शुभ नहीं माना जाता है। शनि की चाल बेहद धीमी है इसलिए इसके परिणाम भी ठोस एवं स्थिर होते हैं। यह मकर और कुंभ राशि का स्वामी है और वृषभ और तुला राशि के लिए योगकारक ग्रह है। लगभग ढाई साल के अंतराल में शनि एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है। शनि को सेवा, नौकर एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं का कारक माना जाता है। इसके प्रभाव से जातक अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परिश्रमी बनता है। यह जातक की संकल्प शक्ति को भी बढ़ाता है इसलिए इसे कर्मों का ग्रह भी कहा जाता है। शनि गोचर के दौरान साढ़े साती को मुख्य रूप से ध्यान में रखा जाता है। साढ़े साती शनि ग्रह के गोचर के दौरान पड़ने वाली स्थिति है। सामान्यत: इसे जातक के लिए अशुभ माना जाता है। इस समयावधि में जातक को उसके कर्मों के आधार पर फलों की प्राप्ति होती है। आइये जानते हैं शनि का गोचर आपके जीवन को किस तरह प्रभावित करेगा ।

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